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कमलेश भारतीय की चार लघुकथाएं

राजनीति के कान ‘मंत्री जी, आपने बड़ा कहर ढाया है’ ‘किस मामले में भाई ?’ ‘अपने इलाके के एक मास्टर का ट्रांसफर करके’ ‘अरे , वह मास्टर ? वह तो विरोधी दल के लिए भाग दौड़….’ ‘क्या कहते हैं , हुजूर ?’ ‘उस पर यही इल्जाम हैं ।’ ‘जरा चल...

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मार्टिन जॉन की तीन लघुकथाएं

लाइक “अरे बेटा , तैयार हो जा | कॉलेज जाने का समय हो गया है |…..कितनी देर से लैपटॉप में घुसे हो !” दादाजी अपने पोते से मुख़ातिब थे | “वेट ए लिटिल दादाजी !……..लाइक्स गिन रहा हूँ |” “काहे का लाइक्स भई ?” “कल हमने मम्मी की डेथ वाली...