शिवदयाल के उपन्यास ‘एक और दुनिया होती’ का एक अंश

                       रात को ओढ़ने के लिए मेरे पास तो कुछ था नहीं। रात एक झोपड़ी के ओसारे में गुजारनी थी।

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव के आने वाले उपन्यास ‘ये इश्क बड़ा आसां’ एक अंश

उसने ध्यान से अहोना की ओर देखा। 50 फीसदी से ज्यादा बाल सफेद हो गए थे। कच्चे-पके बालों की मिलावट

गरीब-शोषितों के लेखक थे गुरदयाल सिंह

वीणा भाटिया गुरदयाल सिंह भारतीय साहित्य की यथार्थवादी परंपरा के ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में पंजाबी उपन्यास और कथा