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एक कवि की डायरी

जयप्रकाश मानस संपादक, www.srijangatha.com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, छत्तीसगढ़-492001 मो.-94241-82664 23 सितंबर 2009 आम आदमी के पास ऊर्जा नगरी कोरबा में हाहाकार मचा हुआ है । बुरी-ख़बर से मन व्याकुल है । कोरबा, एनटीपीसी, छत्तीसगढ़ के पावर प्लांट में लगी चिमनी के ढह जाने...

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मार्टिन जॉन की पांच कविताएं

 बची रहे चिड़िया    चख रही है चिड़िया खिला रही है बच्चों को पेड़ के पके –अधपके फल तृप्ति का मधुर गीत गाते हुए अपनी हरी –भरी बाहों से संभाले फलों की टोकरी गुनगुना रहा है पेड़  क़ुर्बानी वाली कविता मौन रहकर सबकुछ लुटा देने का ज़ज्बा दिखाते हुए |  ...

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नंदना पंकज की कविता ‘कौवे की व्यथा’

मैंने तिनका- तिनका चुना बड़े जतन से घोंसला बुना अपना संसार बसाया दे अंडे परिवार बढ़ाया तन का गर्मी दे सेती रही माँ की ममता देती रही कवच तोड़ चूजे निकल आये मैं रही कलेजे से लगाये अपनी चोंच से खिलाया निवाला आँखों के तारों सा पाला धूप, बारिश, तूफान...