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सुशान्त सुप्रिय की 5 कविताएं

सुशान्त सुप्रिय A-5001, गौड़ ग्रीन सिटी, वैभव खंड, इंदिरापुरम, ग़ाज़ियाबाद – 201014 ( उ.प्र. ) मो : 8512070086 ई-मेल : sushant1968@gmail.com बचपन  दशकों पहले एक बचपन था बचपन उल्लसित, किलकता हुआ सूरज, चाँद और सितारों के नीचे एक मासूम उपस्थिति बचपन चिड़िया का पंख था बचपन आकाश में शान से उड़ती रंगीन पतंगें थीं बचपन माँ का दुलार था बचपन पिता की गोद का प्यार था समय के साथ चिड़ियों के पंख कहीं खो गए सभी पतंगें कट-फट गईं माँ सितारों में जा छिपी पिता सूर्य में समा गए बचपन अब एक लुप्तप्राय जीव है जो केवल स्मृति के अजायबघर में पाया जाता है वह एक खो गई उम्र है जब क्षितिज संभावनाओं से भरा था एकदिन  एक दिन मैंने कैलेंडर से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और अपने मन की करने लगा एक दिन मैंने कलाई-घड़ी से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और खुद में खो गया एक दिन मैंने बटुए से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और बाज़ार को अपने सपनों से निष्कासित कर दिया एक दिन मैंने आईने से कहा — आज मैं मौजूद नहीं हूँ और पूरे दिन उसकी शक्ल नहीं देखी एक दिन मैंने अपनी बनाईं...

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पल्लवी मुखर्जी की 5 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी एक आओ सुनते है एक दूसरे की धड़कनों को धड़कनेंधड़कती हैं जैसेघड़ी की सुईटिक-टिक करती और ले जाती हैं हमेंं उम्र के उस दौर मेंजहाँ न मैं….मैं रहती हूँन तुम….तुम रहते हो हम एक हो जाते हैंउम्मीदों का हरापन लेकर  दो तुम एक पुल होजिस पर सेतमाम रिश्ते गुज़र रहे हैंधड़ाधड़ जैसे गुज़रती...

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पुष्कर बन्धु की 5 कविताएं

पुष्कर बन्धु काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक व परास्नातक ( हिन्दी साहित्य ) 2017 । सोशल मीडिया पर कविताओं का प्रकाशन । साहित्य , समाज और राजनीति में  गहरी रुचि । पता – हौसला सिंह लॉज, नसीरपुर, सुसुवाहि , हैदराबाद गेट , BHU चयन और प्रस्तुति : विहाग वैभव  ...

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नदी पर रोहित ठाकुर की 4 कविताएं

रोहित ठाकुर जन्म तिथि – 06/12/ 1978 शैक्षणिक योग्यता  –   परा-स्नातक राजनीति विज्ञान,विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित, विभिन्न कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ   वृत्ति  –   सिविल सेवा परीक्षा हेतु शिक्षण   रूचि : – हिन्दी-अंग्रेजी साहित्य अध्ययन  पत्राचार :- जयंती- प्रकाश बिल्डिंग, काली मंदिर रोड,संजय गांधी नगर, कंकड़बाग , पटना-800020, बिहार  मोबाइल...

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भास्कर चौधुरी की 10 कविताएं

1 माँ का आना माँ के आते ही मैं असहज हो जाता हूँ हो जाती है पत्नी असहज हम दोनों के कान खड़े छोटी-छोटी बातों को पकड़ लेने की क्षमता एक-ब-एक दुगुनी-तिगुनी हो जाती है   माँ के आते ही खुश हो जाती है हमारी चार साल की बिटिया वह...

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उम्मीद बंधाती कविताएं

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव युवा कवि मनोज चौहान की कविताओं में एक तड़प है। समाज में लगातार बढ़ती असानता उनकी इस तड़प को बढ़ाती जाती हैं और ये तड़प उनकी कविताओं में प्रभावी ढंग से उभर कर आती है। उनके पहले कविता संग्रह ‘पत्थर तोड़ती औरत’ के टाइटल ने ही चौंकाया...

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অঙ্কিতা ব্যানার্জীর কবিতা ‘অভিমানী প্রেম’

এ বসন্তদিনে প্রেমপদ‍্যই মানায় আমি নাহয় আজ বিরহী দুচোখ মেলে বলি ফাগুন, কষ্টও পেতে হয়! প্রেম ছেড়ে যাক ,জলে ভরে যাক আঁখি বিশুদ্ধতম হৃদয়ের চেতনায় অনুভূতিদের যত্নে আগলে রাখি। আঘাতে আঘাতে বিদীর্ণ হোক মন ব্যথা দিয়ে যাক আপেক্ষিক আত্মজন হৃদয়ে তবু রয়ে যাবে ভালোবাসা- মস্তিষ্ক হিসেব কষবে পাওয়ার, আজ প্রেমভরা...

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रमेश शर्मा की पांच कविताएं

  रमेश शर्मा जन्म: 06.6.1966, रायगढ़ छत्तीसगढ़ में . शिक्षा: एम.एस.सी. (गणित) , बी.एड. सम्प्रति: व्याख्याता सृजन: एक कहानी संग्रह मुक्ति 2013 में बोधि प्रकाशन जयपुर से प्रकाशित . छह खंड में प्रकाशित कथा मध्यप्रदेश के छठवें खंड में कहानी सम्मिलित . *कहानियां: समकालीन भारतीय साहित्य , परिकथा, हंस ,पाठ...

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भास्कर चौधुरी की पांच कविताएं

  भास्कर चौधुरी परिचय जन्म: 27 अगस्त 1969 रमानुजगंज, सरगुजा (छ.ग.) शिक्षा: एम. ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी) बी एड प्रकाशन: एक काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन (यात्रा वृतांत) ‘बस्तर में तीन दिन’ प्रकाशित। लघु पत्रिका ‘संकेत’ का छ्ठा अंक कविताओं पर केंद्रित. कविता, संस्मरण,...

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अभी तो दुनिया में अन्धेर है

  जयप्रकाश मानस एक कवि की डायरी : किस्त 7 29 अगस्त, 2015 अभी तो दुनिया में अन्धेर है दिन कब का ढल चुका है, जबकि मेरे भीतर हेमंत दा का स्वर गूँज रहा है, प्रदीप का यह अमर गीत, लक्ष्मीकांत – प्यारेलाल का लाजबाब संगीत के साथ, जो मेरे...

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आनन्द विश्वास के चार गीत

  आनन्द विश्वास जन्म तारीखः– 01- 07-1949 जन्म एवं शिक्षा- शिकोहाबाद (उत्तर प्रदेश) अध्यापन- अहमदाबाद (गुजरात) और अब- स्वतंत्र लेखन (नई दिल्ली) प्रकाशित कृतियाँ- *देवम* (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। *मिटने वाली रात नहीं* (कविता संकलन) (वर्ष-2012) डायमंड बुक्स दिल्ली। *पर-कटी पाखी* (बाल-उपन्यास) (वर्ष-2014) डायमंड बुक्स दिल्ली। 4.*बहादुर बेटी* (बाल-उपन्यास)...

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अंशू सिंह की कविता ‘अंतहीन भूख’

                  अंशू सिंह जन्म 30 अक्टूबर 1987 वाराणसी   काशी हिन्दू वि वि  से स्नातक एवं   स्नातकोत्तर मिट न सकी अंतहीन भूखअभ्यंतर से मेरे अभ्यंतर से बार बार पुनःजन्म हुआचाहिये मुझकोभरपाईतृप्त भरपाई संकीर्ण से अनंततक की प्यास पुनः बुझानी है कालविजयी दशाओं मेंअक्सर भूखा थाउस रोज़ और प्यासा था जब फूटती थीएक...

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परमानन्द रमन की चार कविताएं

परमानन्द रमन जन्मतिथि : 20/12/1983 जन्म-स्थान : जमशेदपुर(तात्कालीन बिहार, वर्तमान झारखण्ड) ग्राम: करहसी, जिला- रोहतास (बिहार) आरंभिक शिक्षा बारहवीं तक जमशेदपुर में ही, तत्पश्चात कला शिक्षा में स्नातक के लिये इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय के मूर्तिकला विभाग में दाखिला। स्नातकोत्तर की शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय  के...

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दीप्ति शर्मा की पांच कविताएं

दीप्ति शर्मा दिल्ली काले तिल वाली लड़की कल तुम जिससे मिलीं फोन आया था वहाँ से तुम तिल भूल आयी हो सुनो लडकियो! ये तिल बहुत आवारा होते हैं चन्द्र ग्रहण की तरह काला तिल आनाज नहीं होता ये पूरी दुनिया होता है जिससे मिलो सँभल कर मिलो ये मिलना...

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परिवर्तन ईमानदार समाज ही कर सकता है

जयप्रकाश मानस संपादक, www.srijangatha. com कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक) एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा रायपुर, एक कवि की डायरी : किस्त 4 10 नवंबर, 2011 जानना है बहुत कुछ आ.रंजना अरगड़े (गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद) ने बड़ी आत्मीयता के साथ 23-24 दिसंबर को होने वाले राष्ट्रीय संगोष्ठी में ‘साहित्य तथा प्रौद्योगिकी...

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जया यशदीप घिल्डियाल की तीन कविताएं

जया यशदीप घिल्डियाल मूल निवासी – पौड़ी गढ़वाल ,उत्तराखंड स्नातकोत्तर रसायन विज्ञान रसायन विज्ञान अध्यापिका पुणे ,महाराष्ट्र कातिलों के बच्चे कातिलों  के बच्चे  उम्र  भर कत्ल  होते हैं सहम जाते लोकल अखबारों  से , खाकी वर्दी से दरवाज़े पर इक हल्की सी भी आहट दहला देती उन्हें घर में आँखों...

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शहंशाह आलम की पांच कविताएं

शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’ पांच कविता-संग्रह प्रकाशित। सभी संग्रह चर्चित। आलोचना की पहली किताब ‘कवि का आलोचक’...

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कविता बनाम ग़ज़ल : भाग 2

    सुशील कुमार जन्म-13/09/ 1964. पटना सिटी (बिहार) में। सम्प्रति : मानव संसाधन विकास विभाग,रांची (झारखंड) में कार्यरत । संपर्क –  सहायक निदेशक/प्राथमिक शिक्षा निदेशालय/ स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग/एम डी आई भवन(प्रथम तल)/ पोस्ट-धुर्वा/रांची (झारखंड)–834004 ईमेल –sk.dumka@gmail. com मोबाइल न. –09431310216 / 09006740311 प्रकाशित कृतियां– कविता-संग्रह कितनी रात...

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डॉ दिग्विजय शर्मा “द्रोण” की तीन कविताएं

डॉ दिग्विजय शर्मा “द्रोण” शिक्षा- एम ए (हिंदी, भाषाविज्ञान, संस्कृत, पत्रकारिता), एम फिल, पीएच डी,। विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं व वेब मीडिया तथा ई-पत्रिकाओं में अनेक लेख, कविताएँ प्रकाशित। राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता। अनेक संस्थाओं से सम्मानित। सम्प्रति- अध्यापन, केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा (भारत) में सेवारत। मोबाइल — 8909274612...

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परितोष कुमार ‘पीयूष’ की कविता ‘मुद्दे की बात’

परितोष कुमार ‘पीयूष’ मोहल्ला- मुंगरौड़ा पोस्ट- जमालपुरपिन- 811214, जिला मुंगेर(बिहार)】 मुद्दे की बात! मुद्दा यह नहीं कि किसने है कितना लूटामुद्दा यह है कि हमने उन्हें लूटने क्यों दिया० मुद्दा यह नहीं कि उसने रिश्वत लीमुद्दा यह है कि हमने प्रतिवाद क्यों नहीं किया० मुद्दा यह नहीं कि उसने जाल बिछायामुद्दा यह है कि हम फँसते क्यों चले गये० मुद्दा...