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डॉ दिग्विजय शर्मा “द्रोण” की तीन कविताएं

डॉ दिग्विजय शर्मा “द्रोण” शिक्षा- एम ए (हिंदी, भाषाविज्ञान, संस्कृत, पत्रकारिता), एम फिल, पीएच डी,। विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं व वेब मीडिया तथा ई-पत्रिकाओं में अनेक लेख, कविताएँ प्रकाशित। राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता। अनेक संस्थाओं से सम्मानित। सम्प्रति- अध्यापन, केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा (भारत) में सेवारत। मोबाइल — 8909274612...

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परितोष कुमार ‘पीयूष’ की कविता ‘मुद्दे की बात’

परितोष कुमार ‘पीयूष’ मोहल्ला- मुंगरौड़ा पोस्ट- जमालपुरपिन- 811214, जिला मुंगेर(बिहार)】 मुद्दे की बात! मुद्दा यह नहीं कि किसने है कितना लूटामुद्दा यह है कि हमने उन्हें लूटने क्यों दिया० मुद्दा यह नहीं कि उसने रिश्वत लीमुद्दा यह है कि हमने प्रतिवाद क्यों नहीं किया० मुद्दा यह नहीं कि उसने जाल बिछायामुद्दा यह है कि हम फँसते क्यों चले गये० मुद्दा...

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कविता बनाम ग़ज़ल : भाग एक

    सुशील कुमार जन्म-13/09/ 1964. पटना सिटी (बिहार) में। सम्प्रति : मानव संसाधन विकास विभाग,रांची (झारखंड) में कार्यरत । संपर्क –  सहायक निदेशक/प्राथमिक शिक्षा निदेशालय/ स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग/एम डी आई भवन(प्रथम तल)/ पोस्ट-धुर्वा/रांची (झारखंड)–834004 ईमेल –sk.dumka@gmail. com मोबाइल न. –09431310216 / 09006740311 प्रकाशित कृतियां– कविता-संग्रह कितनी रात...

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अर्कित पांडेय की कविता ‘उपहार’

अर्कित पाण्डेयछात्रपता- इकौना बाईपास,जिला- श्रावस्ती मैं रहा रात भर सोचता बस प्रिये,दूँ क्या उपहार में जन्मदिन पर तुम्हें। प्रातः आकाश की लालिमा दूँ तुम्हे,या दूँ पंछियों का चहचहाता वो स्वर,नीले आकाश की नीलिमा दूँ तुम्हे,या दूँ भेंट पुष्पों का गुच्छा मधुर, पर प्रकृति सी सजल तुम स्वयं हो प्रिये,क्या ये उपहार देना उचित...

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प्रेम नन्दन की पांच कविताएं

 प्रेम नंदन जन्म – 25 दिसम्बर 1980,को फतेहपुर (उ0प्र0) के फरीदपुर गांव में| शिक्षा – एम.ए.(हिन्दी), बी.एड.। पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा। लेखन – कविता, लघुकथा, कहानी, आलोचना । परिचय – लेखन और आजीविका की शुरुआत पत्रकारिता से। दो-तीन वर्षों तक पत्रकारिता करने तथा तीन-चार वर्षों तक भारतीय रेलवे में स्टेशन मास्टरी  के पश्चात...

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प्रेरणा शर्मा ‘प्रेेरणा’ की सात प्रेम कविताएं

प्रेरणा शर्मा ‘प्रेरणा’ पेशे से अध्यापिका विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं , समाचार पत्रों  में लेख, कविताएं प्रकाशित बोधि प्रकाशन द्वारा  प्रकाशित पुस्तक ‘ स्त्री होकर सवाल करती है ‘  में कविताएं प्रकाशित  हो चुकी हैं । एक प्रभात  के आगमन  से .. निशा  के अवसान  तक .. घूमती  रहती  हूँ...

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आरती कुमारी की दो कविताएं

आरती कुमारी जन्म तिथि:  25 मार्च, 1977 पता:  द्वारा – श्री ए. एन. पी. सिन्हा,  शशि भवन, आजाद काॅलोनी, रोड- 3,  माड़ीपुर, मुजफ्रपफरपुर- 842001,’ शिक्षा: एम.ए. अंग्रेजीद, एम.एड, पीएच-डी. व्यवसाय: सहायक शिक्षिका के रूप में राजकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय, ब्रह्मपुरा, मुजफ्रपफरपुर में  पदस्थापित। प्रकाशन : कैसे कह दूँ सब ठीक...

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भास्कर चौधुरी की दस कविताएं

भास्कर चौधुरी जन्म: 27 अगस्त 1969 रमानुजगंज, सरगुजा (छ.ग.) शिक्षा: एम. ए. (हिंदी एवं अंग्रेजी) बी एड प्रकाशन: एक काव्य संकलन ‘कुछ हिस्सा तो उनका भी है’ एवं गद्य संकलन (यात्रा वृतांत) ‘बस्तर में तीन दिन’ प्रकाशित। लघु पत्रिका ‘संकेत’ का छ्टा अंक कविताओं पर केंद्रित. कविता, संस्मरण, समीक्षा आदि...

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अर्जित पांडेय की कविता ‘पुरुष तू देवता क्यों नहीं?’

अर्जित पाण्डेय अर्जित आईआईटी दिल्ली में इंजीनियरिंग  के छात्र हैं। अच्छा लिखते हैं। पुरुष और महिला को लेकर जिस सोच के साथ हम केवल दिखावे के लिए जीते हैं, उसमें उनकी ये कविता कई लोगों को अजीब लग सकती है लेकिन अर्जित जिस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं, उसकी...

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हमारी भी छापो! हम भी लेखक-वेखक हैं!

व्यंग्य आलोक प्रकाश एक बहुत ही गुणी साहित्यकार हैं. मुझ से उम्र में बड़े हैं. उनका लिहाज करता हूँ मैं. सर कहकर संबोधित करता हूँ उनको. फ़ेसबुक पर उन्होंने एक ग्रुप बनाया हुआ है. इसमें हम साहित्यकारों की कृतियाँ प्रकाशित होती हैं. ग्रुप तो दूसरे भी हैं लेकिन उनका  स्टैंडर्ड मेरे स्टैंडर्ड...

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नीरजा मेहता की कविता ‘ज़िन्दगी एक पहेली’

ज़िन्दगी आदि से अंत तक शाश्वत किन्तु क्षणिक विस्तृत किन्तु संक्षिप्त विचित्र किन्तु सत्य अलबेली किन्तु नित्य चिर परिचित किन्तु अकाल्पनिक रहस्यमयी किन्तु दिलचस्प विस्मयकारी किन्तु प्रभावकारी अभिशापित किन्तु अलौकिक वरदान सी उलझी डोर सी किन्तु सपनों को साकार करती सी प्रवाहमयी अद्भुत अभिव्यक्ति सी भावानुकूल सुसंस्कृत आदर्शमयी कविता की...

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भावना की तीन कविताएं

संवेदनाओं का पौधा अधिकांश औरतें जब व्यस्त होती हैं खरीदने में साड़ी और सलवार सूट तो लेखिकाएं खरीदती हैं अपने लिए कुछ किताबें ,पत्रिकाएॅ और कलम अधिकांश औरतें जब ढूंढती हैं इन्टरनेट पर फैशन का ट्रेंड तो लेखिकाएं तलाशती हैं ऑनलाइन किताबों की लिस्ट अधिकांश औरतें जब नाखून में नेलपाॅलिश...

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प्रभांशु कुमार की दो कविताएं

लेबर चौराहा और कविता सूर्य की पहली किरण के स्पर्श से पुलकित हो उठती है कविता चल देती है लेबर चौराहे की ओर जहां  मजदूरों की बोली लगती है। होता है श्रम का कारोबार गाँव-देहात से कुछ पैदल कुछ साइकिलों से काम की तलाश में आये मजदूरों की भीड़ में...

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राकेश रोहित की सात कविताएं

जब सब लौट जायेंगे सब जब घर लौट जायेंगे मैं कहाँ जाऊंगा इतनी बड़ी दुनिया में नहीं है मेरा कोई वृक्ष! मेरे जीवन में कुछ कलरव की स्मृतियाँ हैं और एक पुराने स्कूल की जिसकी दीवार ढह गयी थी मास्टर जी की पीठ पर छुट्टी का घंटा बजने पर जहाँ...

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अंजना वाजपेई की कविता ‘ये शेष रह जाएंगे’

कुछ गोलियों की आवाजें बम के धमाके , फैल जाती है खामोशी …नहीं, यह खामोशी नहीं सुहागिनों का ,बच्चों का, मां बाप का करूण विलाप है, मूक रूदन है प्रकृति का , धरती का ,आकाश का …..जलेंगी चिताएं और विलीन हो जायेंगे शरीर जो सिर्फ शरीर ही नहीं प्यार है...

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‘मां’ पर अमरजीत कौंके की सात कविताएं

जो कभी नहीं भूलती  ( दिवंगत माँ के लिए सात कविताएं )  1. बहुत भयानक रात थी ग्लूकोज़ की बोतल से बूँद-बूँद टपक रही थी मौत कमरे में माँ को किसी मगरमच्छ की तरह साँस-साँस निगल रही थी बचपन के बाद मैं माँ को पहली बार इतना समय इतना नज़दीक...

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गौतम कुमार ‘सागर’ की चार कविताएं

एक उम्र  की सुराही से रिस रहा है लम्हा लम्हा बूँद बूँद और हमें मालूम तक नहीं पड़ता कितनी स्मृतियाँ पुरानी किताब के जर्द पन्ने की तरह धूमिल पड़ गई हमें मालूम तक नहीं पड़ता बिना मिले , बिना देखे कितने अनमोल रिश्ते औपचारिकता में तब्दील हो जाते है हमें...

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विभा परमार की दो कविताएं

सवाल आने बंद हो जाएं… मेरे भीतर चलती रहती है सवालों की सीरीज अनवरत गति से जैसे हवा चलती है, पानी बहता है और साँसें चलती हैं सोचती हूँ अक्सर हवा गर रुक जाये तो दम घुटता है पानी रुक जाये तो सड़ने लगता है सवाल आने बंद हो जाएं...

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ओम नागर की चार कविताएं

तुम और मैं तुम मंच पर मैं फर्श पर बैठा हूँ एक सच्चे सामाजिक की तरह तुम्हें चिंता है अपने कलफ़ लगे कुर्ते पर सिलवट उतर आने की मुझे तो मुश्क़िल हो रहीं यह सोचते कि अभी और कितनी खुरदरी करनी हैं तुम्हें तथाकथित तरक्की की राह तुम किस अजाने...

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बेखौफ़ होकर सच बोलतीं कविताएं

पुस्तक समीक्षा सत्येन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव रोहित कौशिक के कविता संग्रह ‘इस खंडित समय में’ की समीक्षा जिस समाज में नफ़रत फैलाने वालों को सम्मानित किया जा रहा हो, वह समाज जाहिर तौर अपने पतन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा होगा। ऐसे समाज में सच बोलने वाले या तो...