Tagged: rain

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বর্নালী চন্দ র অনুগল্প ‘ফিরে দেখা’

ছাতাটা নিয়ে যা, বাইরে কালো মেঘ করেছে, বৃষ্টি আসছে তেড়ে। মার কথা কানে না তুলেই একছুটে বাইরে বেরিয়ে গেল অহনা। কোচিং ক্লাসে দেরি হয়ে যাবে। বেরিয়েই দেখল, চারিদিকে ঘন কালো মেঘ করেছে, বৃষ্টি নামল বলে। প্রায় দৌড়ে মন্দিরের মোড়টা ঘুরেই কুন্তলদাদের বাড়ির সামনে আসতেই পাদুটো অজান্তেই আস্তে হয়ে গেল। বুকের...

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डॉ भावना की तीन कविताएं

उस रात उस रात जब बेला ने खिलने से मना कर दिया था तो ख़ुशबू उदास हो गयी थी उस रात जब चाँदनी ने फेर ली अपनी नज़रें चाँद को देखकर तो रो पड़ा था आसमान उस रात जब नदी ने बिल्कुल शांत हो रोक ली थी अपनी धाराएँ तो...

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वेद प्रकाश की तीन प्रेम कविताएं

एक लंबी प्रेम कविता तुम धूप में अपने काले लंबे बाल जब-जब सुखाती हो सूरज का सीना फूल जाता है और पूरे आकाश पर छा जाता है मैंने देखा है गुलमुहर के नीचे बस का इंतजार करते हुए बस आए या न आए तुम्हारी छाया गुलमुहर को चटख कर देती...

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रवि सुतार की तीन कविताएं

पासपोर्ट स्विट्ज़रलैंड हो जैसे गाँव का बस स्टैंड खेत से गाँव की दूरी जितनी है उतनी ही दूर तेरे लिए सिडनी है डिनर दुबई में ब्रेकफास्ट के लिए इटली है स्लिम सा ड्रिंक हैबिट तेरी यार तेरा काश्तकार अमली है अंग्रेजन पट गई तू कैसे..?? घास नहीं डालती मुझे गाँव...

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डॉ. श्रुति फौगाट की कविता ‘यादों के मौसम’

कभी वक़्त कतरा कतरा बह रहा होता है तो याद आ जाते हैं कुछ पुराने पल, मानो सालों से बंद डायरी के पन्ने पलट गए हों, और उस बंद पुरानी डायरी की खुशबू कुछ कुछ नयी सी लगती है हर बार… खामोश सी हो जाती हूँ मैं, हर पलटते पन्ने...

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पंकज शर्मा की तीन कविताएं

1. मुकम्मल वक्त बता देती हैं. मुझे मंदिर की घंटियाँ ये जरूरी नहीं कि जगाने के लिए भगवान ही आएं दिख जाता है सत्य मजलूम की आँखों में भी ये जरूरी नहीं कि इसके लिए श्मशान ही जायें मेरे घर के कबाड़ में पड़े हैं कई टूटे फूटे खिलौने…. माँ...

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शहंशाह आलम की पांच कविताएं

राग : पाँच चित्र एक उस लड़की ने तीली जलाई माचिस की तीली की ज़रा-सी रौशनी ने आग का नया गीत ईजाद किया   तीली की वही आग हमारे भीतर बची है और सूरज के भी।   दो आज जिस भी द्वार को खोला मैंने उसमें चुप्पी नहीं मिली अनंत...

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राज्यवर्द्धन की चार कविताएं

छठ मइया तुम्हें सलामत रखें! एक दीप हर दीपावली में तुम्हारे नाम का आज भी जला आती हूँ – छत पर   रास्ता दिखाने तुम्हारे हृदय तरंगों को पता नहीं कब आ जाये भूले भटके   आज भी तो हिचकी आई थी खाते खाते कहा माँ ने कि कोई याद...