हेमन्त वशिष्ठ की कविता ‘आपकी क्या राय है’

” नहीं यार मैं नहीं पूछूंगा … मेरा मन नहीं मानता … ये उस टाइप का लगता ही नहीं है “… — ‘ ये कैसे कह दिया आपने ‘… “कभी बातें सुनी हैं आपने इसकी “… ‘ कभी … हां कभी कभी ही तो बोलता है … जाने कौन घमंड...