यशपाल शर्मा की तीन लघुकथाएं

सच्चा प्यार “यार मैं कोमल के बिना ज़िंदा नहीं रह सकता।” रमण ने बड़ी ही मासूमियत के साथ कहा। “क्यूँ? ” मैंने अनायास ही पूछ लिया। ” तुम नहीं जानते मैं कोमल से कितना प्यार करता हूँ।  सच्चा प्यार।  बहुत ज़्यादा चाहता हूँ मैं उसे। अपनी जान से भी ज़्यादा।...