Tagged: Struggle

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अमरजीत कौंके की पांच कविताएं

साहित्य अकादमी, दिल्ली ने पंजाबी के कवि , संपादक और अनुवादक डा. अमरजीत कौंके सहित 23 भाषाओँ के लेखकों को वर्ष 2016 के लिए अनुवाद पुरस्कार देने की घोषणा की है. अमरजीत कौंके को यह पुरस्कार पवन करन की पुस्तक ” स्त्री मेरे भीतर ” के पंजाबी अनुवाद ” औरत मेरे...

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विजय ‘आरोहण’ की नौ कविताएं

सारंडा, जंगल और आदिवासी,जल, जंगम और प्रतिरोध की कवितायें 1. हमारे पहाड़ों के बच्चे हमारे पहाड़ों के बच्चे गिल्ली-डंडा खेलते है वह छुप्पम-छुपाई खेलते शाल के पेड़ों के पीछे छिप जाते हैं वह तीर-धनुषों से निशाना साध रहे हैं इसके लिए वह एक बिजुका बनाते हैं और दनदनाती आती है...

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सुशांत सुप्रिय की कहानी ‘विरासत’

श्रीकांत जिस दिन अठारह साल का हुआ , उसी दिन उन्मादियों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरा दी । देश में जगह-जगह दंगे शुरू हो गए जिनमें निर्दोष लोग मारे जाने लगे । उस दिन श्रीकांत देर तक रेडियो और टी.वी. पर ख़बरें देखता-सुनता रहा । आज़ाद भारत के इतिहास...

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गौतम कुमार सागर की लघुकथा ‘एक ब्रेक’

“पिछले चार महीने से एक दिन की छुट्टी नहीं. लास्ट क्वॉर्टर का प्रेसर. जिंदगी एक कुत्ता दौड़ बन गयी है. कभी फायरिंग , कभी वॉर्निंग , कभी इन्सेंटिव का लालच , कभी प्रमोशन का इंद्र धनुषी छलावा. ओह ! दिमाग़ फट जाएगा.”- हितेश अपनी नव विवाहित पत्नी रम्या से बड़ी...

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गरीब-शोषितों के लेखक थे गुरदयाल सिंह

वीणा भाटिया गुरदयाल सिंह भारतीय साहित्य की यथार्थवादी परंपरा के ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में पंजाबी उपन्यास और कथा साहित्य को एक विशिष्ट पहचान दिलाई। विश्व साहित्य में इन्हें प्रेमचंद, गोर्की और लू शुन के समकक्ष माना जाता है। प्रेमचंद के बाद शायद ही किसी भारतीय साहित्यकार को दुनिया...

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मज़दूरों के संघर्ष का देखा-भोगा सच

पुस्तक समीक्षा सुशील कुमार आजादी के इतने सालों बाद भी जब दुनिया के प्रगतिशील देशों में रोटियों के हादसे हो रहे हों तो परिवेश का दबाव कवि को जनाकीर्ण विभीषिका पर कविता लिखने को मजबूर करता है। गोया कि , युवा कवि सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव का पहला काव्य संकलन “रोटियों...

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सीमा संगसार की छह कविताएं

खंडहर स्त्रियाँ जी लेती हैं अपने अतीत रूपी खंडहरों में जो कभी कभी सावन में हरिया जाते हैं — वीरानगी तो उसकी पहचान है जहाँ आवाज दो तो वह पुनः लौट आती है सभी खंडहरों में दफन होते हैं कई राज जिसे स्त्रियों ने दबा कर रखा होता है किसी...

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शहंशाह आलम की पांच कविताएं

 विस्थापन मेरा यह विस्थापन करोड़ों-करोड़ बरस का है जाना हुआ जिसमें छिपाने जैसा कुछ भी नहीं न बचाने जैसा कुछ है कुछ है भी बचा हुआ तो वह दूर किया जा चुका है मुझसे   अड़ा खड़ा उस पेड़ को जब हटाया गया बलपूर्वक कितने-कितने पक्षी विस्थापित हो गए बरसात...

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डॉ संध्या तिवारी की लघु कथा ‘ठेंगा’

उसके आगे तंगी हमेशा मुंह बाए खड़ी रहती थी लेकिन देह को धंधे के लिये उपयोग में लाना उसे कभी मंजूर न था लेकिन गरीबी कैसे दूर की जाये इस का उपाय वह खोजती ही रहती थी। इसी क्रम में किसी ने उसे बताया , कि वह गुरुवार का व्रत...

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अनवर सुहैल की तीन कविताएं

एक नफरतों से पैदा नहीं होगा इंक़लाब लेना-देना नहीं कुछ नफ़रत का किसी इंक़लाब से नफ़रत की कोख से कोई इंक़लाब होगा नहीं पैदा मेरे दोस्त ताने, व्यंग्य, लानतें और गालियाँ पत्थर, खंज़र, गोला-बारूद या कत्लो-गारत यही तो हैं फसलें नफ़रत की खेती की… तुम सोचते हो कि नफ़रत के...

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दशरथ की कहानी

सुनील मिश्रा कमाकर अपना व परिवार का पेट भर लेना, ये सपना भले ही देखने-सुनने में बड़ा छोटा लगता हो, मगर बहुत सारे लोगों की आँखों में तैरता ये सपना उन्हें अपने घरों से दूर बहुत दूर ले जाता है, पिछले दिनों नोएडा में ऐसे ही एक मुस्कराते हुए शख्स...

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नित्यानंद गायेन की दो कविताएं

नित्यानंद गायेन   अगले वर्ष अगले वर्ष फिर निकलेगी झांकी राजपथ पर  भारत भाग्य विधाता  लेंगे सलामी  डिब्बों में सजाकर परोसे जाएंगे  विकास के आंकड़े शहीदों की विधवाओं को पदक थमाएं जाएंगे राष्ट्र अध्यक्षों के शूट की चमक और बढ़ जाएगी  जलती रहेगी अमर ज्योति इंडिया गेट पर  मूक खड़ी...

युवा पत्रकार पंकज जैन की ये फोटो बहुत कुछ कहती है। ये तस्वीर भरतपुर के जवाहर जी की है। दोनों हाथ बचपन से पोलियो का शिकार हैं। रोजाना 4 किलोमीटर पैदल घूमकर, 16 लीटर दूध की सप्लाई करते हैं। 0

युवा पत्रकार पंकज जैन की पैनी नज़र

युवा पत्रकार पंकज जैन की ये फोटो बहुत कुछ कहती है। ये तस्वीर भरतपुर के जवाहर जी की है। दोनों हाथ बचपन से पोलियो का शिकार हैं। रोजाना 4 किलोमीटर पैदल घूमकर, 16 लीटर दूध की सप्लाई करते हैं। अमरजीत कौंके की पांच कविताएं विजय ‘आरोहण’ की नौ कविताएं सुशांत...