Tagged: suicide

0

सुशान्त सुप्रिय की कहानी ‘मिसफिट’

सुशान्त सुप्रिय मार्फ़त श्री एच. बी. सिन्हा , 5174, श्यामलाल बिल्डिंग , बसंत रोड, ( निकट पहाड़गंज ) , नई दिल्ली – 110055 मो:  8512070086 ई-मेल: sushant1968@ gmail.com उसका सिर तेज़ दर्द से फटा जा रहा था । उसने पटरी से कान लगा कर रेलगाड़ी की आवाज़ सुननी चाही । कहीं कुछ नहीं था । उसने जब-जब जो जो चाहा, उसे नहीं  मिला । फिर आज  उसकी  इच्छा   कैसे  पूरी हो सकती थी । पटरी  पर लेटे-लेटे उसने कलाई-घड़ी देखी ।  आधा घंटा ऊपर हो चुका था पर इंटरसिटी एक्सप्रेसका कोई अता-पता  नहीं  था । इंटरसिटी एक्सप्रेस न सही , कोई पैसेंजर गाड़ी ही सही । कोई मालगाड़ी ही सही । मरने वाले को इससे क्या लेना-देना  कि  वह  किस गाड़ी  के  नीचे  कट  कर  मरेगा ।  उसके सिर के भीतर कोई हथौड़े चला रहा था । ट्रेन उसे क्या मारेगी, यह सिर-दर्द ही उसकी जान ले लेगा — उसने सोचा । शोर भरी गली में एक लंबे सिर-दर्द  का नाम ज़िंदगी है । इस ख़्याल से ही उसके मुँह में एक कसैला स्वाद भर गया । मरने के समय मैं भी स्साला फ़िलास्फ़र हो गया हूँ — सोचकर वह पटरी पर लेटे-लेटे ही मुस्कराया । उसका हाथ उसके पतलून की बाईं जेब में गया । एक अंतिम सिगरेट सुलगा लूँ । हाथ विल्स का पैकेट लिए बाहर  आया  पर  पैकेट  ख़ाली  था ।  दफ़्तर से चलने से पहले ही उसने पैकेट की अंतिम सिगरेट पी ली थी — उसे याद आया । उसके होठों पर गाली आते-आते रह गई । आज सुबह से ही दिन जैसे उसका बैरी हो गया था ।सुबह पहले पत्नी से खट-पट हुई । फिर किसी बात पर उसने बेटे को पीट दिया । दफ़्तर के लिए निकला  तो  बस...

0

सुशांत सुप्रिय की तीन कविताएं

1. स्त्रियाँ हरी-भरी फ़सलों-सी प्रसन्न है उनकी देह मैदानों में बहते जल-सा अनुभवी है उनका जीवन पुरखों के गीतों-सी खनकती है उनकी हँसी रहस्यमयी नीहारिकाओं-सी आकर्षक हैं उनकी आँखें प्रकृति में ईश्वर-सा मौजूद है उनका मेहनती वजूद दुनिया से थोड़ा और जुड़ जाते हैं हम उनके ही कारण 2. वह...

1

दिनेश शर्मा की तीन कविताएं

बीड़ी तुम्हारी पैदाइश निम्नवर्गीय है जंगली पत्तों की तुम्हारी खाल गन्दे हाथों में आकर ही शक्ल लेती है। तुम्हारा जीवन एक चिंगारी से शुरू होता है आजीवन तुम शड़ड़-शड़ड़ साँस लेती हुई बुझती हो। तुम्हारे कुनबे का टी. बी. से क्या गहरा नाता है जिसके होंठ चूमती हो उसके फेफड़ों...

1

रवि सुतार की तीन कविताएं

पासपोर्ट स्विट्ज़रलैंड हो जैसे गाँव का बस स्टैंड खेत से गाँव की दूरी जितनी है उतनी ही दूर तेरे लिए सिडनी है डिनर दुबई में ब्रेकफास्ट के लिए इटली है स्लिम सा ड्रिंक हैबिट तेरी यार तेरा काश्तकार अमली है अंग्रेजन पट गई तू कैसे..?? घास नहीं डालती मुझे गाँव...

3

नित्यानंद गायेन की दो कविताएं

नित्यानंद गायेन   अगले वर्ष अगले वर्ष फिर निकलेगी झांकी राजपथ पर  भारत भाग्य विधाता  लेंगे सलामी  डिब्बों में सजाकर परोसे जाएंगे  विकास के आंकड़े शहीदों की विधवाओं को पदक थमाएं जाएंगे राष्ट्र अध्यक्षों के शूट की चमक और बढ़ जाएगी  जलती रहेगी अमर ज्योति इंडिया गेट पर  मूक खड़ी...

1

स्मिता मृणाल की दो कविताएं

स्मिता मृणाल रेस्ट इन पीस प्रत्यूषा कितना आसान होता है झूठ के आवरण में सच को छुपा देना जाने कितने ही रहस्य कैद होते हैं इस सच और झूठ के बीच और इन रहस्यों की खोज में हम पाते हैं खुद को तर्क और वितर्क के दो अंतिम छोरों पर...