सुशांत सुप्रिय की कहानी ‘बंटवारा’

मेरा शरीर सड़क पर पड़ा था । माथे पर चोट का निशान था । क़मीज़ पर ख़ून के छींटे थे । मेरे चारो ओर भीड़ जमा थी । भीड़ उत्तेजित थी । देखते-ही-देखते भीड़ दो हिस्सों में बँट गई । एक हिस्सा मुझे हिंदू बता रहा था । केसरिया झंडे...