Tagged: THE LAST COACH

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हाफ गर्लफ्रेंड

  संजय स्वतंत्र द लास्ट कोच : किस्त 9 राजीव चौक से वह मेरे साथ ही आखिरी डिब्बे में सवार हुई है। वह जिस तरह बार-बार अपने चेहरे को पोंछ रही है, उससे लगता है कि वह काफी दूर से और कई काम निपटा कर आई है। रूमाल से वह...

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लौट आओ गौरैया

  संजय स्वतंत्र द लास्ट कोच : किस्त 5 दिल्ली में बरसों से नन्हीं सुकोमल गौरैया नहीं दिख रही। किसी को मालूम भी नहीं कि वह कहां गुम हो गई। एक दिन दफ्तर के सबसे युवा साथी धीरेंद्र ने बताया कि उसके करावल नगर इलाके में गौरैया दिखने लगी है।...

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मां जियेगी तो हम जियेंगे

संजय स्वतंत्र द लास्ट कोच : किस्त 4 गंगा-यमुना को लेकर जिस दिन उत्तराखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया, तब से इन दोनों नदियों को लेकर मैं बेहद भावुक हो गया हूं। यों भी हम सभी भारतीय दिल से भावुक और कल्पनाशील होते हैं। कोई एक दशक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री...

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दिल चुरा के देखो

      संजय स्वतंत्र बिहार की उस मिट्टी से जन्म का नाता है, जो अभावों और सपनों के संघर्ष के साथ एक इंसान बनने की तमीज पैदा करती है। जब हिंदी पट्टी विचार और बाजार से जूझ रहा था, तब पिता की सरकारी नौकरी के कारण देश की राजधानी...