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राकेश रोहित की सात कविताएं

जब सब लौट जायेंगे सब जब घर लौट जायेंगे मैं कहाँ जाऊंगा इतनी बड़ी दुनिया में नहीं है मेरा कोई वृक्ष! मेरे जीवन में कुछ कलरव की स्मृतियाँ हैं और एक पुराने स्कूल की जिसकी दीवार ढह गयी थी मास्टर जी की पीठ पर छुट्टी का घंटा बजने पर जहाँ...

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डॉ भावना की तीन कविताएं

उस रात उस रात जब बेला ने खिलने से मना कर दिया था तो ख़ुशबू उदास हो गयी थी उस रात जब चाँदनी ने फेर ली अपनी नज़रें चाँद को देखकर तो रो पड़ा था आसमान उस रात जब नदी ने बिल्कुल शांत हो रोक ली थी अपनी धाराएँ तो...

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सुधीर कुमार सोनी की छह कविताएं

बेमिसाल मुहब्बत पानी के गहरे तल में पत्थर है पत्थर के गहरे तल में पानी है पानी है पत्थर है अटूट प्रेम है यह शायद कोई नहीं जानता कि इनके प्रेम की मिसाल दी जाए धीरे-धीरे कटकर प्रेम में सब कुछ मिटा देना पत्थर के सिवाय कोई नहीं जानता युगों-युगों से...

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मल्लिका मुखर्जी की तीन कविताएं

सामंजस्य कितना सामंजस्य है सपनों और वृक्षों में ! दोनों पंक्तियों में सजना पसंद करते हैं । कितना भी काटो-छाँटों उनकी टहनियाँ, तोड़ लो सारे फल चाहे नोंच लो सारी पत्तियाँ, मसल दो फूल और कलियाँ; फिर भी पनपते रहते हैं असीम जिजीविषा के साथ जब तक उन्हें जड़ से...

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केशव शरण की 15 कविताएं

क्या कहूंगा क्या मैं कह सकूंगा मालिक ने अच्छा नहीं किया अगर किसी ने मेरे सामने माइक कर दिया क्या मैं भी वही कहूंगा जो सभी कह रहे हैं बावजूद सब दुर्दशा के जो वे सह रहे हैं और मैं भी क्या मैं भी यही कहूंगा कि आगे बेहतरीन परिवर्तन...

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वेद प्रकाश की तीन प्रेम कविताएं

एक लंबी प्रेम कविता तुम धूप में अपने काले लंबे बाल जब-जब सुखाती हो सूरज का सीना फूल जाता है और पूरे आकाश पर छा जाता है मैंने देखा है गुलमुहर के नीचे बस का इंतजार करते हुए बस आए या न आए तुम्हारी छाया गुलमुहर को चटख कर देती...

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डॉ छवि निगम की पांच कविताएं

स्वतंत्रता एक भेड़ के पीछे पीछे खड्ढे में गिरती जाती अंधाधुंध पूरी कतार को भाईचारे को मिमियाती पूरी इस कौम इतनी सारी ‘मैं’ हम न हो पायीं जिनकी अब तक, उनको… चंहु ओर होते परिवर्तन से बेखबर चाबुक खाते आधी आँखों पे पड़े  परदे से सच आंकते झिर्री भर साम्यवाद...

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विजय ‘आरोहण’ की नौ कविताएं

सारंडा, जंगल और आदिवासी,जल, जंगम और प्रतिरोध की कवितायें 1. हमारे पहाड़ों के बच्चे हमारे पहाड़ों के बच्चे गिल्ली-डंडा खेलते है वह छुप्पम-छुपाई खेलते शाल के पेड़ों के पीछे छिप जाते हैं वह तीर-धनुषों से निशाना साध रहे हैं इसके लिए वह एक बिजुका बनाते हैं और दनदनाती आती है...

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संजीव ठाकुर की तीन बाल कविताएं

 दाना दे दो          दाना दे दो चिड़िया को ओ! मेरी नानी और वहीं डालो बर्तन में थोड़ा-सा पानी। आएगी तो खाएगी चिड़ियों की रानी खुश होकर उड़ जाएगी पीकर वह पानी। फिर भेजेगी औरों को वह लेने दाना, पानी खुश हो जाओगी, देखोगी उनको पीते पानी! दीपों का त्योहार दीपों...

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वीणा भाटिया की चार कविताएं

प्रकृति से… 1. नदी की धारा में हाथ डालना छूना महसूस करना कितनी बातें करती है नदी हमसे   जाने कब से है धरती पर कहाँ-कहाँ से गुज़र कर कितने तट कितने रास्ते पार करती बहती जा रही है   सबसे सरल सृजन है बचपन के बनाए चित्रों में जो...

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प्रतिभा चौहान की पांच कविताएं

आज का दिन शताब्दियों ने लिखी है आज अपने वर्तमान की आखिरी पंक्ति आज का दिन व्यर्थ नहीं होगा चुप नहीं रहगी पेड़ पर चिड़िया न खामोश रहेंगी पेड़ों की टहनियाँ न प्यासी गर्म हवा संगीत को पियेगी न धरती की छाती ही फटेगी अंतहीन शुष्कता में न मुरझायेंगे हलों...

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मार्टिन जॉन की पांच कविताएं

 बची रहे चिड़िया    चख रही है चिड़िया खिला रही है बच्चों को पेड़ के पके –अधपके फल तृप्ति का मधुर गीत गाते हुए अपनी हरी –भरी बाहों से संभाले फलों की टोकरी गुनगुना रहा है पेड़  क़ुर्बानी वाली कविता मौन रहकर सबकुछ लुटा देने का ज़ज्बा दिखाते हुए |  ...

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प्रतिभा सिंह की पांच कविताएं

1 किसी ने कहा आदमी खूबसूरत है मैंने कहा पेड़ खूबसूरत है… फिर आदमी की कुछ खूबसूरती क्रोध ने, कुछ ईर्ष्या ने, कुछ लोभ ने, कुछ द्वेष ने छीन ली …. फिर छीन ली दिल ख्वाहिशों  ने फिर एक दिन आदमी ने पेड़ के वज़ूद को मिटा डाला खूबसूरती के...

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राज्यवर्द्धन की तीन कविताएं

फूल फूल अच्छे लगते हैं लेकिन वे जो निषेचित होकर बनते हैं – फल देते हैं –अन्न सुरक्षित रहता है – बीज भविष्य की यात्रा के लिए कैसे कहूँ उस फूल को सुंदर जो बिना कुछ दिए अभिशप्त होते हैं – झड़ने को । पेड़ जब हम अपनी हवस में...

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सुशांत सुप्रिय की पांच कविताएं

माँ , अब मैं समझ गया मेरी माँ बचपन में मुझे एक राजकुमारी का क़िस्सा सुनाती थी राजकुमारी पढ़ने-लिखने घुड़सवारी , तीरंदाज़ी सब में बेहद तेज़ थी वह शास्त्रार्थ में बड़े-बड़े पंडितों को हरा देती थी घुड़दौड़ के सभी मुक़ाबले वही जीतती थी तीरंदाज़ी में उसे केवल ‘ चिड़िया की...