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বর্নালী চন্দ র অনুগল্প ‘ফিরে দেখা’

ছাতাটা নিয়ে যা, বাইরে কালো মেঘ করেছে, বৃষ্টি আসছে তেড়ে। মার কথা কানে না তুলেই একছুটে বাইরে বেরিয়ে গেল অহনা। কোচিং ক্লাসে দেরি হয়ে যাবে। বেরিয়েই দেখল, চারিদিকে ঘন কালো মেঘ করেছে, বৃষ্টি নামল বলে। প্রায় দৌড়ে মন্দিরের মোড়টা ঘুরেই কুন্তলদাদের বাড়ির সামনে আসতেই পাদুটো অজান্তেই আস্তে হয়ে গেল। বুকের...

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पंकज शर्मा की तीन कविताएं

1. मुकम्मल वक्त बता देती हैं. मुझे मंदिर की घंटियाँ ये जरूरी नहीं कि जगाने के लिए भगवान ही आएं दिख जाता है सत्य मजलूम की आँखों में भी ये जरूरी नहीं कि इसके लिए श्मशान ही जायें मेरे घर के कबाड़ में पड़े हैं कई टूटे फूटे खिलौने…. माँ...