गियासुर्रहमान की कहानी ‘बीच की दीवार’

उर्दू कहानी मूल लेखक :  गियासुर्रहमान अनुवाद : नसीम अजीजी पूरे दस दिन हो गए थे। फ़साद की आग जो भड़की तो बुझने का नाम नहीं लेती थी। सारे शहर में सख्त कर्प्यू के बावजूद वारदातें हो रही थीं। पूरी दस रातें आंखों में गुजर गईं। इस क़दर शोर-शराबे में...