Tagged: village

0

डॉ संगीता गांधी की लघुकथा ‘गंवार’

“ए, ये क्या कर रहा है ?” खेत के कोने में दीर्घशंका को  बैठे रमेश को देख  चौधरी साहब ने कहा । चौधरी साहब  मुम्बई में रहते थे ।गांव में भी घर था तो दो -चार साल में गांव का चक्कर लगा लेते थे । ……….गांव वाले उनकी नज़र में...

0

विजयानन्द विजय की दो लघुकथाएं

पेंटिंग ट्रेन का एसी कोच — जिसमें आम तौर पर सम्पन्न लोग ही यात्रा करते हैं।आमजनों के लिए तो यह शीशे-परदे और बंद दरवाजों के अंदर की वो रहस्यमयी दुनिया है, जिसके बारे में वे जानते तक नहीं हैं। एक परिवार आमने-सामने की छ: सीटों पर अपने पूरे कुनबे के...

0

रोहित कौशिक की पांच कविताएं

चुप है  किसान खेत में हल जोतता  किसान और तैयार बगुलूे चुनने को कीड़े-मकोड़े कीड़े-मकोड़े/जो मिटा सकते हैं बगुलों की भूख और हानिकारक हैं फसल के लिए इसलिए चुप है  किसान इसी व्यवस्था के बीच बगुलों का भोजन बन रही है केंचुओं की जमात भी। और अब किसान मजबूर है...

0

गरीब-शोषितों के लेखक थे गुरदयाल सिंह

वीणा भाटिया गुरदयाल सिंह भारतीय साहित्य की यथार्थवादी परंपरा के ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने पूरी दुनिया में पंजाबी उपन्यास और कथा साहित्य को एक विशिष्ट पहचान दिलाई। विश्व साहित्य में इन्हें प्रेमचंद, गोर्की और लू शुन के समकक्ष माना जाता है। प्रेमचंद के बाद शायद ही किसी भारतीय साहित्यकार को दुनिया...