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निर्मल गुप्त की कविता ‘कलिंग कहां-कहां है?’

  निर्मल गुप्त बहुत दिन बीते कलिंग की कोई सुधबुध नहीं लेता चक्रवर्ती सम्राट को बिसराए हुए अरसा हुआ प्रजा लोकल गोयब्ल्स के इर्द गिर्द जुटती है उसे इतिहास की तह में उतरने से अधिक शब्द दर शब्द फरेब के व्याकरण में अपना त्रिदर्शी भविष्यकाल इस किनारे से साफ साफ...

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सुधीर कुमार सोनी की छह कविताएं

बेमिसाल मुहब्बत पानी के गहरे तल में पत्थर है पत्थर के गहरे तल में पानी है पानी है पत्थर है अटूट प्रेम है यह शायद कोई नहीं जानता कि इनके प्रेम की मिसाल दी जाए धीरे-धीरे कटकर प्रेम में सब कुछ मिटा देना पत्थर के सिवाय कोई नहीं जानता युगों-युगों से...

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रोहित कौशिक की पांच कविताएं

चुप है  किसान खेत में हल जोतता  किसान और तैयार बगुलूे चुनने को कीड़े-मकोड़े कीड़े-मकोड़े/जो मिटा सकते हैं बगुलों की भूख और हानिकारक हैं फसल के लिए इसलिए चुप है  किसान इसी व्यवस्था के बीच बगुलों का भोजन बन रही है केंचुओं की जमात भी। और अब किसान मजबूर है...

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अर्नेस्ट हेमिंग्वे की कहानी ‘इन अनदर कंट्री’

अमेरिकी कहानी दूसरे  देश में मूल लेखक : अर्नेस्ट हेमिंग्वे अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद : सुशांत सुप्रिय शरत् ऋतु में भी वहाँ युद्ध चल रहा था , पर हम वहाँ फिर नहीं गए । शरत् ऋतु में मिलान बेहद ठण्डा था और अँधेरा बहुत जल्दी घिर आया था । फिर...

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भरत प्रसाद की लंबी कविता ‘बंधक देश’

(अपने ही देश में  दर –ब –दर  हुई इराक की जनता को समर्पित ) तौल  दिया है खुद को गिरवी  रख दी  है , उसने शरीर  की बेच  डाली है आत्मा , मजहब  के हाथों तौल  दिया है खुद को , खुदा के आगे जी कर भी वह अपने लिए...

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शैलेंद्र शांत की पांच कविताएं

गांधी जी के बंदर जो देख सकते हैं देखना नहीं चाहते जो बोल सकते हैं बोलना नहीं चाहते जो सुन सकते हैं सुनना नहीं चाहते बहुत समझदार हो गए हैं गांधी जी के बंदर!   जिंदगी! तू कहीं सजा तो नहीं… खुद ही पूछ बैठती हो जब भी पाती हो...

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शुक्ला चौधरी की पांच कविताएं

युद्ध और जीवन बहुत पेचीदा मामला है ये युद्ध हुआ युद्ध तो भी मैं सोचूंगी अपने बारे में ही कि किस तरह तुम तक पहुंचू और तुमसे कहूं कि लो मुझे छू कर बैठो शायद- पृथ्वी बच जाए. दुनिया इस फूल पर से गुज़रकर कोई युद्ध नहीं होगा/यहीं फूल को...

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शिवदयाल की तीन कविताएं

वार वे/पहले मारते हैं शब्दों से, जुमलों से गोदते हैं पहले-पहल जैसे – गद्दार ! तब करते हैं खंजरों-तमंचों से वार …! मालूम है इन्हें कि अगर कहीं खाली भी जाये वार खंजर का तब भी शब्द अपना काम करते रहेंगे ….. एक पूरा, मुकम्मिल इंतजाम है यह चाँदमारी का...

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शुक्ला चौधरी की 5 कविताएं

शुक्ला चौधरी युद्ध न मिसाइलें दाग न अस्त्र दिखा तू देखता जा युद्ध आरंभ हो चुका है एक बूंद पानी के लिए एक और युद्ध की तैयारी रात सरपट दौड़ रही है पानी के लिए बरतन खाली कर रही है औरतें/रात दो बजे सार्वजनिक नल से पतली सी धार पानी...