शहंशाह आलम के कविता संग्रह ‘थिरक रहा देह का पानी’ से 5 कविताएं


  1. तीली

आपके पास कितना कुछ बचा है

अब भी जीने के लिए कई सदियां

मेरे पास एक तीली बची है माचिस की

आपके अंधेरे कोने को रौशन करने के लिए

यह तीली बचाए रखना चाहूंगा

उसके प्रेम के बचे रहने तक

2. मुझ में

मैने देखा मेरे अंदर एक नदी है

जो हंसा रही है तट को तल को

एक दरख़्त है तोतों से भरा हुआ

मुझमें एक खानाबदोश है

जो जी रहा है मुद्दतों से घुमंतू

एक चांद है जो मेरी ही तरह

बांट रहा है रोज़ दुआएं

शत्रु की बद्दुआओं के बदले

मैंने देखा जो शहर ढह गया था

सदियों पहले भरभराकर

वही शहर खड़ा हो रहा है

मुझमें लम्हा-दर-लम्हा

3. जल को जपता हूं

जल को जपता हूं

जब-जब जपता हूं

समुद्र को मथता हूं

जब उपेक्षित महसूस करता हूं

गहरे तल में बैठ
सचमुच-सचमुच

गहरी शक्ति पाता हूं।

4. पहली बा

मैंने पहली-पहली बार कुछ स्त्रियों को देखा

जो नदी को छू रही थीं नदी उन्हें अपनत्व से

अब आप सोचेंगे कि यह आदमी पगला गया है

स्त्रियों को तो हम रोज ही देखते हैं अनथक

लेकिन मैंने सचमुच पहली-पहली बार देखा

स्त्रियों को इस कठिन जटिल काल में

पूरी निश्छलता से हंसते हुए लहालोट

उनकी छाती में दूध ही दूध देखा भरा हुआ

जैसे शहद के  छत्ते भरे होते हैं मीठे शहद में

देवताओं और देवतात्माओं के भय से मुक्त

मैंने पहली-पहली बार कुछ स्त्रियों को देखा

ऐसा तो मुझे रोज़ देखना था

पृथ्वी को, स्त्री को बलात्कार कर लिए जाने के

भय से मुक्त कराते

दूब और वनस्पतियों के बीच रहते

बिना किसी पछतावे के

बिना किसी संशय के

5. अविरल जल

मेरे भीतर जल है लगातार बहता हुआ

पूरी तरह लयात्मक किसी झरने-सा

पूरी तरह सोते हुए पाषाणों को

सोते हुए मनुष्यों को

उठाता-जगाता हुआ

जैसे मचलता है उसका भी जल

जैसे थिरकता है उसका भी जल

जैसे छलकता है उसका भी जल

उसी के देहकुंड की मधुशाला में

झरकर गिरीं देवदार की पत्तियों के साथ

वैसे ही तो रेतीले इस समय को

जलथल  कर रहा है मेरे भीतर का जल

अविचलित विजित विरामहीन

मेरे जीवन की सारी कठिनाइयों को

कहीं और बहा ले जाते हुए

देखना

मैंने देखा जो दुष्टात्माएं हैं वहां-यहां

उनमें भी थोड़ा अच्छा बचा रह गया है

जो सांप हैं विषधर उन्होंने भी

विष की थैली में छिपा रखा है

अमृत थोड़ा सा

जो हत्यारे हैं

उनको भी रोते देखा

उनके ही समय के

सन्न-सन्न सन्नाटे में

जो बलात्कारी हैं

उसे भी खुद को

दुत्कारते देखा

आईने के निकट

यह दृश्य

यह बिम्ब

मैंने देखा

मैंने ही देखा।

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