तीन युवा कवि, तीन कविताएं

मैंने सहेजा है तुम्हें

गौरव भारती

मैंने सहेजा है तुम्हें
ज्यों पत्तियां सहेजती हैं धूप
माटी सहेजती है बारिश
फूल सहेजता है खुशबू
चाँद सहेजता है चांदनी
ज्यों माँ सहेजती है
बच्चों के लिबास संग लिपटी यादें

मैंने सहेजा है तुम्हें
जैसे बचपन की बदमाशियां
नानी की कहानियां
माँ के दुलार
पापा की फटकार
दादी की गठरी से निकले सिक्के
क्रिकेट खेलते तुक्के से लग गए छक्के
छत पर दिनभर की पतंगबाजी
कंचा और निशानेबाजी

मैंने सहेजा है तुम्हें
बिन बताएं बस तुम्हे ताक कर
सोहबत में वक़्त थोड़ा गुजारकर
सहेजा है तुम्हें तुम्हारी स्मृतियाँ
बुन बुनकर ज्यों बुनती है स्वेटर

मैंने सहेजा है तुम्हें
कुछ यूँ कि दीवारें तुम्हें जानती है
मेरी कविता तुम्हें पहचानती है
मानो मेरी कहानी की नायिका हो तुम
प्रेम का अद्भुत एहसास हो तुम

मैंने सहेजा है तुम्हें
ज्यों तिनका तिनका चिरैया बनाती है घोंसला
ज्यों कुम्हार गढ़ता है बर्तन
मधुमक्खियां जुटाती है शहद
अथक अथक अथक ।

सपनों में

परितोष कुमार पीयूष
दिन भर की
थकान के बाद
जब आंखें बार-बार
बंद करने पर भी
नींद नहीं आती
चुभती है
सिलवटें बिस्तर की
घड़ी की टिकटिक में
खतरों की
दबी आवाज
सुनाई देती है
मध्य रात्रि को
खुली आँखों में
फिर
वंचितों और शोषितों के
सपने आते हैं
उन दर्दनाक
डरावने सपनों में
जानवरों के साथ
आदमी
जूठे पत्तलों की
छीना-झपटी करते
दिखाई पड़ते हैं
खैराती अस्पतालों में
बिना इलाज के दम तोड़ते
गरीबों की
हुकहुकी की आवाज
सुनाई देती है
मानवी गिद्धों की
झुंड में फँसी
बेबस, बेसहारा
सन्नाटे को चीरती
उस किशोरी की
चीख के साथ ही
मेरी तंद्रा टूट जाती है
फिर सुबह
सोचता हूँ
मन ही मन
क्या ऐसे सपने
सिर्फ मुझे आते हैं?
जवाब की आशा में
फिर
रात हो जाती है

कभी घर भी मेरे आओ न

आभाष कुमार सौरभ
हम जब भी मिले
बीच रास्ते ही मिले
आते-जाते हुए,
कभी घर भी मेरे आओ न..

कुछ क़िस्से कहूँगा
कुछ यादें गुथुंगा
कुछ तुम भी आकर कभी
कुछ सुनाओ न
कभी घर भी मेरे तुम आओ न..

है तुम्ही से मेरा उम्र भर का रिश्ता
इसे अब प्यार से तुम भी निभाओ न
बीच में बने अहंकार की दीवार को गिराओ न
कभी  घर भी मेरे तुम आओ न…

हम जब भी मिले
मुझे लगता है बस कल ही मिले
आते-जाते हुए हँस कर मिले
फिर जो रह गया है गिले उसको भुला कर
आओ न
कभी घर भी मेरे तुम आओ न…

जब तुम पास मेरे रहती थी
कितना तुम शरमाती थी
फिर वापस आकर कभी वैसे ही शर्माओ न
कभी घर भी तुम मेरे आओ न..

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2 Responses

  1. Magan Choudhary says:

    Nice one bro keep it up …..

  2. Shivam says:

    Bahut achhe abhash…

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