विष्णु खरे को हार्दिक श्रद्धांजलि

कवि-आलोचक-संपादक विष्णु खरे का जाना सचमुच हिन्दी साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। लिटरेचर प्वाइंट की ओर से उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि। वे हमारे दिलों में अमर रहेंगे।

उनकी इस कविता को पढ़िए और महसूस कीजिए कि वो कितने महान कवि थे।

 

नींद में

कैसे मालूम कि जो नहीं रहा
उसकी मौत नींद में हुई ?

कह दिया जाता है
कि वह सोते हुए शांति से चला गया

क्या सबूत है ?
क्या कोई था उसके पास उस वक़्त
जो उसकी हर साँस पर नज़र रखे हुए था
कौन कह सकता है कि अपने जाने के उस क्षण
वह जगा हुआ नहीं था
फिर भी उसने
आँखें बंद रखना ही बेहतर समझा
अब वह और क्या देखना चाहता था ?
उसने सोचा होगा कि किसी को आवाज़ देकर
या कुछ कहकर भी अब क्या होगा ?

या उसके आसपास कोई नहीं था
शायद उसने उठने की फिर कोशिश की
या वह कुछ बोला
उसने कोई नाम लिया

मुझे कभी कभी ऐसा लगा है
कि जिन्हें नींद में गुज़र जाने वाला बताया जाता है
उसके बाद भी एक कोशिश करते होंगे
उठने की
एक बार और तैयार होने की
लेकिन उसे कोई देख नहीं पाता है

पता नहीं मुझे ऐसा शक क्यों है
कि कम से कम यदि मेरे साथ ऐसा हुआ
तो मैंने वैसे एक आख़िरी कोशिश ज़रूर की होगी
जब साँस रुक जाने के बाद भी
नाखून कुछ देर तक बढ़ते रहते हैं
तो वैसा भी क्यों मुमकिन नहीं होता होगा
क्या जो चीज़ें देखी नहीं जातीं
वे होती ही नहीं?
लिहाज़ा मैं सुझाव देना चाहता हूँ
कि अगली बार अगर ऐसा कुछ हो
कि कहना पड़े कोई सोते सोते नहीं रहा
तो यह कहा जाए
कि पता नहीं चला वह कैसे गुज़रा
जब वह नहीं रहा होगा
तब हम सब नींद में थे

क्या मालूम शायद वह ज़्यादा सही हो ?
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उनके कविता संग्रह – पाठांतर  से साभार।

 

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