योगेंद्र कृष्णा की तीन कविताएं

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3 Responses

  1. Sushma sinha says:

    बहुत अच्छी कविताएँ !!
    ‘शब्द चुक गए थे जहाँ
    मैं खुद मौजूद था वहाँ ‘

  2. Nikhileshwar verms says:

    गहरे संवेदना की कविताएं हैं योगेंद्र कृष्णा की

  3. योगेन्द्र कृष्णा कविताओं में बिम्बों का छद्म आलोक नहीं रचते , बल्कि अपने परिवेश और लोक का आलोक का आभास अपनी विशिष्ट शैली की काव्यभाषा से ही देते हैं ,इसलिए इनकी रचना का कथ्य पाठकों के अन्तस्तल को गहराई से स्पर्श करता है।

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