गांव पर डी एम मिश्र की पांच ग़ज़लें

  डी एम मिश्र एक नम मिट्टी पत्थर हो जाये ऐसा कभी न हो मेरा गाँव, शहर हो जाये ऐसा कभी न हो। हर इंसान में थोड़ी बहुत तो कमियाँ होती हैं वो बिल्कुल ईश्वर हो जाये ऐसा कभी न हो। बेटा, बाप से आगे हो तो अच्छा लगता है...