अनिरुद्ध सिन्हा की चार ग़ज़लें

एक

आपसे  और  न ग़ैरों से  गिला रहता है
दर्द की धूप में  साया  भी खफ़ा रहता है
नींद इस सोच से आई न कभी भी मुझको
ख़्वाब आँखों की सियासत से ज़ुदा रहता है
बात  अपनी मैं  कोई तुझसे कहूँ  तो कैसे
तेरे  भीतर तो  कोई  और  छुपा  रहता है
जो कि सहरा में चले धूप लिए पलकों पर
सर्द रुत में भी  वही  तनके खड़ा रहता है
फ़र्क क्या है कि मैं नज़रों से हटा लूँ दर्पण
मेरे आँसू  को  मगर ग़म का पता रहता है

दो
तेरे  सिवा कहीं न  किसी  से जुदा हुए
फिर ये बता कि रूह से  कैसे रिहा हुए
तुझको जो भूलने की हुई भूल क्या कभी
आँसू  हमारी आँख  के हमसे  खफ़ा हुए
हमने लहू से गीत लिखे हैं तमाम  उम्र
हालात  अपने  आप  कहाँ खुशनुमा हुए
सर से जो  इंतज़ार का  पानी  उतर गया
खुशबू थे हम भी ख़ुद में बिखरके हवा हुए
रहते थे जो  खुलूस  से अपने पड़ोस  में
लम्हों  के  भेद-भाव  से  वे  बेवफ़ा हुए

तीन
जीने  के  साथ -साथ  ही  मरता  चला  गया
मैं  उसकी  धड़कनों  में  उतरता  चला  गया
चुन-चुन के अपने ख़्वाब भी रखता तो किस तरह
आँखें  खुलीं  तो  ख़्वाब  बिखरता  चला  गया
क्या जाने  क्या हुआ  कि अदालत  के  सामने
अपनी   ज़ुबान  से  वो  मुकरता  चला  गया
किस्मत  भी क्या  अजीब थी जिसकी तलाश में
बेखौफ   रास्तों   से   गुज़रता   चला   गया
रिश्तों  के  इतने  नाग  उठाए   हुए  थे  फन
मैं  हर  कदम  पे ख़ुद  से ही डरता  चला गया

चार
गरीबी जब कभी  हालात  से रिश्ता निभाती है
मेरे कच्चे  मकानों  से कोई आवाज़  आती  है
खमोशी छाई  रहती है  सवालों  के उठाने  पर
सियासत गुफ़्तगू  से हर दफा  दामन बचाती है
अदब की  तंग चादर  ओढ़  लेते  ही कोई बेटी
लड़कपन गाँव की गलियों में हँसकर छोड़ जाती है
कलेंडर में  शहीदों  की  जो  सूरत  देखता हूँ तो
गुलामी  की  कोई  तारीख  मेरा  दिल  दुखाती है
मुहब्बत की  कलाई  को  हवस  के थाम लेते  ही
शराफ़त  चीख़  उठती  है  वफ़ा  आँसू  बहाती  है


अनिरुद्ध सिन्हा
पांच  ग़ज़ल संग्रह, पांच आलोचना की  पुस्तकें प्रकाशित, एक  कहानी संग्रह  और
एक कविता संग्रह भी प्रकाशित।
बिहार के प्रतिनिध ग़ज़लकार, समय सुरभि अनत, जनपथ का ग़ज़ल विशेषांक  का संपादन
बिहार उर्दू  अकादमी, बिहार राजभाषा, विद्या वाचस्पति के अतिरिक्त दर्जनों साहित्य संस्थाओं द्वारा
सम्मानित
संप्रति–स्वतंत्र लेखन
संपर्क -गुलज़ार पोखर,मुंगेर (बिहार )811201
Email-anirudhsinhamunger@gmail।com

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1 Response

  1. Usha Tiwari says:

    बहुत सुंदर यथार्थ भाव से भरी ग़ज़ले
    साधुवाद !!!

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