Category: आलोचना

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अंधेरे होते समय में उम्मीद की किरण है ‘काठ में कोंपल’

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव लंबी कहानी को निभाना बहुत कठिन होता है लेकिन अगर कहानीकार का नाम रमेश उपाध्याय हो तो फिर कुछ भी असंभव नहीं है। अपनी नई कहानी ‘काठ में कोंपल’ में रमेश जी ने यह चमत्कार कर दिखाया है। 6 अप्रैल को गांधी-शांति प्रतिष्ठान, आईटीओ में ‘कथा-कहानी’ की...

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जिंदगी से अथक जंग की कहानियाँ

शैलेंद्र शांत   पुस्तक समीक्षा यह कोलकाता के कथाकार उदयराज जी की किताब के बाबत चंद बातें हैं। कहानियों की किताब, जिसमें छोटी-बड़ी कुल 17 कहानियां दर्ज हैं। लेखक की किताब का नाम “आरंभ” है, जो किताब के मामले में आरंभ ही है, यानी पहली किताब। उम्मीद की जाए कि...

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हम सब जिसे शबाना के नाम से जानते हैं

पुस्तक समीक्षा मैं शबाना ( उपन्यास ) लेखक : यूसुफ़ रईस  प्रकाशक : नोशन प्रेस ( इंडिया, सिंगापुर, मलेशिया ), ओल्ड नं. 38, न्यू नं. 6, मैक निकोल्स रोड, चैटपट, चेन्नई – 600 013 मूल्य : ₹ 199 मोबाइल संपर्क : 09829595160 शहंशाह आलम शहंशाह आलम हम सब जिसे शबाना...

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आदमी को मुकम्मल बनाने वाली कविताएं

शहंशाह आलम आनन्द गुप्ता जन्म : 19 जुलाई 1976, कोलकाता शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर प्रकाशन : देश की कुछ महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन। कुछ आलेख भी प्रकाशित। कई ब्लॉग पर कविताएँ प्रकाशित। कुछ भारतीय भाषाओं में कविताओं के अनुवाद प्रकाशित। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन...

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सादगी और आत्मीयता का पारस्परिक रचाव

उमाशंकर सिंह परमार भास्कर चौधुरी छत्तीसगढ़ के हैँ, युवा कवि हैं, गद्य और पद्य दोनों में समान हस्तक्षेप रखते हैँ। मैंने उनका लिखा जो भी पढ़ा है, उस आधार पर मेरी मान्यता है कि भास्कर कवियों की भारी भरकम भीड़ में बड़ी दूर से पहचाने जा सकते हैं । वह...

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औजार की तरह भाषा का इस्तेमाल करते उमाशंकर सिंह परमार

शहंशाह आलम जन्म : 15 जुलाई, 1966, मुंगेर, बिहार शिक्षा : एम. ए. (हिन्दी) प्रकाशन : ‘गर दादी की कोई ख़बर आए’, ‘अभी शेष है पृथ्वी-राग’, ‘अच्छे दिनों में ऊंटनियों का कोरस’, ‘वितान’, ‘इस समय की पटकथा’, ‘थिरक रहा देह का पानी’ छह कविता-संग्रह तथा आलोचना की पहली किताब ‘कवि...

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परसाई की रचनाओं का रंगमंचीय दृष्टिकोण

  अखतर अली मूलतः नाटककार, समीक्षा एवं लघु कथाआें का निरंतर लेखन, आमानाका, कुकुर बेड़ा रायपुर (छ. ग.) माे. न. 9826126781 हरिशंकर परसाई को पढ़ना स्वयं को अपडेट करना है | जब हम परसाई जी को पढ़ रहे होते हैं दरअसल उस क्षण हम अपने समय को पढ़ रहे होते...