Category: गद्य

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सामाजिक विषमताओं पर प्रहार करती कविताएं

डॉ कृष्णकान्त द्विवेदी देश व प्रदेश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में  आलेख,कविताएँ व साक्षात्कार निरन्तर  प्रकाशित होते रहते हैं। आजकल, उत्तर प्रदेश, साहित्य अमृत जैसी प्रमुख पत्रिकाओं में   प्रकाशन।    सम्प्रति-:             सहायक प्रोफेसर    ( हिंदी) पं.सुंदरलाल मेमोरियल परास्नातक महाविद्यालय,कन्नौज   (उ प्र)     ई  मेल –  : krishnakantdubey394@ gmail. com...

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ग़ज़ल का क़द मनुष्यता से तो ऊँचा नहीं

ओम निश्चल हिंदी के सुपरिचित कवि, गीतकार एवं आलोचक। ‘शब्‍द सक्रिय हैं'(कविता संग्रह) एवं ‘शब्‍दों से गपशप'(आलोचना),  ‘भाषा की खादी'(निबंध) सहित भाषा व आलोचना-समीक्षा की अनेक कृतियां प्रकाशित। अज्ञेय सहित कई कवियों के कविता-चयन, अधुनांतिक बांग्ला कविता एवं कुंवर नारायण पर केंद्रित आलोचनात्‍मक पुस्‍तक ‘अन्‍वय’ एवं ‘अन्‍विति’ का संपादन। उत्तर...

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अंधेरे होते समय में उम्मीद की किरण है ‘काठ में कोंपल’

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव लंबी कहानी को निभाना बहुत कठिन होता है लेकिन अगर कहानीकार का नाम रमेश उपाध्याय हो तो फिर कुछ भी असंभव नहीं है। अपनी नई कहानी ‘काठ में कोंपल’ में रमेश जी ने यह चमत्कार कर दिखाया है। 6 अप्रैल को गांधी-शांति प्रतिष्ठान, आईटीओ में ‘कथा-कहानी’ की...

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रमेश उपाध्याय की कहानी ‘काठ में कोंपल’

रमेश उपाध्याय सम्मान गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार (केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा), साहित्यिक पत्रकारिता पुरस्कार (वनमाली सृजनपीठ, भोपाल), ‘नदी के साथ’ (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा पुरस्कृत), ‘किसी देश के किसी शहर में’, ‘डॉक्यूड्रामा तथा अन्य कहानियाँ’ (दोनों पुस्तकें हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पुरस्कृत) संपर्क 107, साक्षरा अपार्टमेंट्स, ए-3, पश्चिम...

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जिंदगी से अथक जंग की कहानियाँ

शैलेंद्र शांत   पुस्तक समीक्षा यह कोलकाता के कथाकार उदयराज जी की किताब के बाबत चंद बातें हैं। कहानियों की किताब, जिसमें छोटी-बड़ी कुल 17 कहानियां दर्ज हैं। लेखक की किताब का नाम “आरंभ” है, जो किताब के मामले में आरंभ ही है, यानी पहली किताब। उम्मीद की जाए कि...

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2020 के मानबहादुर सिंह लहक सम्मान की घोषणा

कोलकाता से प्रकाशित चर्चित पत्रिका ‘लहक’ 2020 के लिए मानबहादुर सिंह लहक सम्मान की घोषणा कर दी है। अगले वर्ष ये सम्मान मधुरेश और कांति कुमार जैन को प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान है, पुरस्कार नहीं। न ही इसमे किसी तरह की रचनाएँ आमन्त्रित की जाती हैं, न चयन की...

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आज के समय में ब्रेख्त

पटना के महाराजा कांप्लेक्स में स्थित टेक्नो हेराल्ड में साहित्यिक संस्था ‘जनशब्द’ द्वारा जर्मन के प्रसिद्ध कवि बरतोल्ट ब्रेख़्त पर केंद्रित समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित था। पहला सत्र ‘आज के समय में ब्रेख़्त’, जबकि दूसरा सत्र ब्रेख़्त को समर्पित कवि-सम्मेलन का था। कार्यक्रम...

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ओम नागर की 7 प्रेम कविताएं

ओम नागर 20 नवम्बर, 1980 को गाँव -अन्ताना, तहसील -अटरु, जिला- बारां  ( राजस्थान ) में  जन्मे ओम नागर ने कोटा विश्वविद्यालय,कोटा से  हिन्दी  एवं राजस्थानी में स्नातकोत्तर और  पी-एचडी की उपाधि प्राप्त की। हिन्दी एवं राजस्थानी साहित्य में कवि,अनुवादक और डायरी लेखक के रूप में  विशिष्ट पहचान रखने वाले युवा कवि- लेखक...

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कोलकाता में 2 दिवसीय साहित्यिक पत्रिका सम्मेलन

भारतीय भाषा परिषद ने 16-17 फरवरी को साहित्यिक पत्रिका सम्मेलन का आयोजन किया है, जिसमें देश भर से पहुंचने वाले संपादक-लेखक साहित्यिक पत्रिकाओं की दशा-दिशा, वर्तमान और भविष्य पर अपनी राय रखेंगे। भारतीय भाषा परिषद के प्रेक्षागृह में होने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन प्रसिद्ध हिन्दी कथाकार गिरिराज...

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ऐसे होते हैं हमारे पहले के कवि

जबलपुर में कवि मलय से मुलाकात पर लिखा है डॉ करण सिंह चौहान ने अजीब बात थी कि मध्यप्रदेश के अधिकांश शहरों में जाना हुआ लेकिन जबलपुर में जाना यह पहली बार हुआ । और जाना भी क्या ऐसा-वैसा ! अपने वरिष्ठ कवि मलय का सम्मान करने के लिए जाना...

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हम हर बार ,बार बार मिलेंगे बाबा रहीमदास

मानबहादुर सिंह लहक सम्मान 2019 के चौथे आयोजन के तहत दिनांक 24- 01- 2019 को दोपहर एक बजे रामघाट चित्रकूट (नवगाँव) स्थित रहीम की कुटिया में कविता पाठ एवं परिचर्चा गोष्ठी सम्पन्न हुई । गोष्ठी का संयोजन युवा कवि नारायण दास गुप्त ने किया एवं अध्यक्षता डा़ कर्णसिंह चौहान ने...

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मौजूदा साहित्यिक परिदृश्य में लोकोदय प्रकाशन का ऐतिहासिक हस्तक्षेप

अगर समाज में सबकुछ ठीक हो, सबकुछ अनुकूल हो तो लेखक कुछ नहीं लिख पाएगा क्योंकि साहित्य की प्रासंगिकता विरोध में ही होती है। यह मानना है वरिष्ठ और मशहूर आलोचक कर्ण सिंह चौहान का। लखनऊ के लोकोदय प्रकाशन की ओर से “समकालीन साहित्यिक परिदृश्य और घटती पाठकीयता” विषय पर...

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डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी की 2 लघुकथाएं

मुखौटे साथ-साथ खड़े दो लोगों ने आसपास किसी को न पाकर सालों बाद अपने मुखौटे उतारे। दोनों एक-दूसरे के ‘दोस्त’ थे। उन्होंने एक दूसरे को गले लगाया और सुख दुःख की बातें की। फिर एक ने पूछा, “तुम्हारे मुखौटे का क्या हाल है?” दूसरे ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया, “उसका...

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शिवदयाल के उपन्यास ‘एक और दुनिया होती’ का एक अंश

                       रात को ओढ़ने के लिए मेरे पास तो कुछ था नहीं। रात एक झोपड़ी के ओसारे में गुजारनी थी। पुआल का बिस्तर लगा और मुझे सहारा मिला बम्बइया से। उनके पास कंबल था। बीड़ी सुलगाने के पहले उन्होंने कंबल खोला और मुझ पर डाल दिया। कुछ इधर-उधर की बात...

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मीनू परियानी की लघुकथा ‘माता का जगराता’

सुबह से ही कोठी में रौनक थी। नौकर-चाकर सब दौड़ रहे थे। शाम को माता का जगराता जो होने वाला था। बेटा, बहू सब अति व्यस्त। आज सुबह से माँ कुछ अस्वस्थ थी। बेटा एक बार जाकर माँ का हाल पूछ आया था। बहू तो वैसे  ही अतिव्यस्त थी। ‘माँ को भी...

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मनोज मंजुल की कहानी ‘रूबी की मां’

मनोज मंजुल नूर मुहम्मद ‘नूर’ के ग़ज़ल संग्रह ‘सबका शायर’ खरीदने के लिए नीचे की तस्वीर पर क्लिक करें रूबी की माँ काफी परेशान है, उसका मन भारी-भारी है, चिंता से उसके चेहरे पर जो रेखाऎं उभर आईं हैं वे काफी गहरी दीख रहीं है. वह उस खतरे के बारे...

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विष्णु खरे को हार्दिक श्रद्धांजलि

कवि-आलोचक-संपादक विष्णु खरे का जाना सचमुच हिन्दी साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। लिटरेचर प्वाइंट की ओर से उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि। वे हमारे दिलों में अमर रहेंगे। उनकी इस कविता को पढ़िए और महसूस कीजिए कि वो कितने महान कवि थे।   नींद में कैसे मालूम कि जो नहीं रहा...

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विनोद कुमार दवे की कहानी ‘सहायता’

विनोद कुमार दवे बस में बैठे-बैठे मैंने अनुमान लगाया, जयपुर पहुंचते पहुंचते बारह बज जाएंगे। जगह-जगह बस का रुकना मुझे बेचैन कर रहा था, अभी सात घंटे बाकी थे। इतना लंबा वक़्त बस में काटना बहुत मुश्किल है। मैं पछता रहा था, ट्रेन से आता तो बहुत सुविधाजनक रहता। “खैर...

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सुशान्त सुप्रिय की कहानी ‘और फिर अंधेरा’

सुशान्त सुप्रिय अमेजन पर अभी बुक करें। कवर पेज पर क्लिक करें इस माह के आखिरी हफ्ते में प्रकाश्य प्रिय गुरमीत ,                       यहाँ हैवलॉक द्वीप , अंडमान के डॉल्फ़िन गेस्ट हाउस से मैंने पिछले हफ़्ते भी तुम्हें पत्र लिखा था  पर तुमने इस पते पर मेरे पत्र का जवाब नहीं दिया है । क्या तुम मुझे पत्र लिखने का अपना वादा भूल गए हो? पिताजी बता रहे हैं कि वहाँ दिल्ली में बहुत गड़बड़ चल रही है । पिछले हफ़्ते से विश्व की सभी प्रमुख महाशक्तियाँ विनाशकारी तृतीय विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़ी हैं । पिताजी का कहना है किअमेरिका और यूरोपीय देश एक ओर हैं जबकि चीन , रूस और उत्तर कोरिया दूसरी ओर हैं । चारो ओर भयऔर आतंक का माहौल छाया हुआ है । डाक-व्यवस्था भी बाधित हुई होगी । शायद इसीलिए तुम्हारी लिखी चिट्ठी मुझे नहीं मिली है । वहाँ हमारा दोस्त नफ़ीस  कैसा है ? और जेनेलिया कैसी है ?  मैं तुम्हारे और  स्कूल के सभी दोस्तों के लिए चिंतित हूँ । सच कहूँ तो मुझे पिताजी की तृतीय विश्वयुद्ध वाली बात पर पूरा यक़ीन नहीं है । हो सकता है , वहाँ दिल्ली में सब ठीक हो और तुमने आलस के मारे मुझे पत्र लिखा ही नहीं हो । हमें यहाँ अंडमान के हैवलॉक द्वीप आए हुए एक हफ़्ते से ज़्यादा समय हो गया है । तुम्हें पता है , मम्मी तो यहाँ आना ही नहीं चाहती थी । वह तो कश्मीर जाना चाहती थी , पर पिताजी हम सब को मना कर यहाँ ले आए । वैसे मेरी  इच्छा शुरू से ही अंडमान के जंगलों में घूमने की थी । अब तो मम्मी को भी यहाँ के समुद्र-तट और यहाँ की हरियाली अच्छी लगने लगी है । इस बीच वहाँ दिल्ली में रितिक रोशन की नई फ़िल्म  लगने वाली थी । जब मैं वापस आऊँगा और सब ठीक होगा तो हम दोनों अपने पापा-मम्मी के साथ इकट्ठे वह फ़िल्म देखने जाएँगे । यहाँ डॉल्फ़िन गेस्ट हाउस के पास के ‘ बीच ‘ से समुद्र में सूर्योदय और सूर्यास्त बहुत सुंदर लगते हैं । पास ही मछलियों से भरी एक छोटी सी नदी भी बह रही है । हमें बहुत मज़ा आ रहा है । हमने बहुत सारी तस्वीरें खींची हैं । जब मैं वापस दिल्ली आऊँगा तब तुम्हें ये सारी सुंदर फ़ोटो दिखाऊँगा । हमारे पड़ोस में  केरल का एक परिवार ठहरा हुआ है । अंकल-आंटी के साथ एक प्यारी-सी छोटी बच्ची भी है । मैं उसके साथ खेलता हूँ । तुम्हारी बहुत याद आ रही है । तुम कैसे हो ? मैं मोबाइल फ़ोन पर तुमसे बात करना चाहता था पर इन  दिनों यहाँ कोई भी फ़ोन काम नहीं कर रहा । पोस्ट-ऑफ़िस यहाँ से दूर है । यहाँ के रसोइया माइकेल अंकल हफ़्ते में दो बार दूर के बाज़ार जा कर खाने-पीने का सामान ख़रीद लाते हैं । लौटते हुए वे डाक-घर से यहाँ की चिट्ठियाँ भी ले आते हैं । तुम्हारी चिट्ठी की प्रतीक्षा है , दोस्त । — तुम्हारा मित्र , पलाश ।...

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आशीष कुमार त्रिवेदी के उपन्यास ‘तुम्हारे लिए’ का एक अंश

नीचे की पुस्तकों को पढ़ने के लिए तस्वीर पर क्लिक करें उपन्यास अंश आशीष कुमार त्रिवेदी के उपन्यास ‘तुम्हारे लिए’ का एक अंश मदन से मिलने के बाद से जय और भी बेचैन हो गया था। मन में उथल पुथल मची थी। इतना सब कुछ होने के बाद भी क्या...