Category: किताबें

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दुष्प्रचारों से नहीं दब सकता गांधी का सत्य

पुस्तक समीक्षा सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव गांधी के देश में गोडसे की पूजा होने लगे, तो खुद से यह सवाल पूछना ही चाहिए कि गांधी की विरासत को संभालने में हमसे कहां चूक हो गई? गांधी को जितना समझा है, उससे मैं यह अनुमान लगा सकता हूं कि अगर आज वो...

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आग का पता बताने वाली कहानियां

पुस्तक समीक्षा सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव उसे वो पसंद हैंजो मुंह नहीं खोलतेउसे वो पसंद हैंजो आंखें बंद रखते हैंउसे वो पसंद हैंजो सवाल नहीं करतेउसे वो पसंद हैंजिनका खून नहीं खौलताउसे वो पसंद हैंजो अन्याय का प्रतिकार नहीं करतेउसे मुर्दे पसंद हैंवो राजा है(लोकोदय प्रकाशन, लखनऊ से प्रकाशित कविता संग्रह ‘अंधेरे अपने...

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यादों का खूबसूरत कैनवास

पुस्तक समीक्षा सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ‘रवि मेरे लिए जीते-जी एक लंबी प्रेम कहानी थे। अब तो वे कथा अनन्ता बन गए हैं।’  वाणी प्रकाशन से सद्य प्रकाशित ‘अन्दाज-ए-बयां उर्फ़ रवि कथा’ में ममता कालिया ने एक जगह यह बात लिखी है। यह पुस्तक रवींद्र कालिया की इन्हीं अनन्त कथाओं में...

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इश्क : छोटे कलेवर में बड़ा संदेश देता उपन्यास

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव पितृसत्तात्मक समाज की सबसे बड़ी ध्वजवाहिका स्त्री ही होती है। परंपरा, रिवाज, संस्कार के नाम पर जाने-अनजाने बेटियों से लेकर बहुओं तक पर पुरुषशासित समाज के उन नियमों को कड़ाई से पालन करने की जिम्मेदारी स्त्रियों के कंधों पर ही होती है, जो अन्तत: उन्हें बेड़ियों में...

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वो जहां जाते हैं, दक्खिन टोला साथ चलता है

पुस्तक समीक्षा कहानी संग्रह : दक्खिन टोला कहानीकार : कमलेश प्रकाशक : वाणी प्रकाशन मूल्य : 300 रुपए सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव बाहर से जो साबूत गांव दिखता है, अन्दर से वह उतना साबूत भी नहीं होता। होश संभालने से पहले ही जाति का वायरस खून को ऐसा संक्रमित करता है...

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आज का सच दर्शाती कहानियां

पुस्तक समीक्षा पुस्तक: किस मुकाम तक  लेखक: हरियश राय  प्रकाशक:प्रकाशन संस्थान, नई दिल्ली  मूल्य: ₹250  पृष्ठ: 128   डॉ. नितिन सेठी         आज की कहानी बदलते जीवन और समाज पर पड़ने वाले विभिन्न प्रभावों की पड़ताल करती है। विज्ञान के युग में जहां हजारों ऐप्स और गैजेट्स ने हमारी मुश्किलें आसान...

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दुनिया की भयावहता से लड़ने की ऊर्जा देने वाली किताब

पुस्तक समीक्षा सीमा संगसार तोत्तो चान एक अकेली ऐसी पुस्तक थी , जिसे मेरे कई शुभचिंतकों ने पढ़ने की सलाह दी। अमेजन पर उपलब्ध नहीं होने की वजह से मैं इसे पढ़ नहीं पा रही थी। एक आदर्श शिक्षक और एक माँ के लिए यह किताब पढ़ना उतना ही जरूरी...

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बढ़ती अमानुषिकता के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलन्द करती पत्रिका

कथन अंक 83-84 बढ़ती अमानुषिकता से जूझती दुनिया पर केंद्रित संपादक :  संज्ञा उपाध्याय पता :107, साक्षरा अपार्टमेंट्स ए -3, पश्चिम विहार, नयी दिल्ली-110063 फोन–9818184806 मूल्य 100 रुपए पत्रिका सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव कोरोना वायरस से बचने के लिए पुरी दुनिया ने खुद को ताले में बन्द कर लिया है। पूरी...

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वक्त की नब्ज टटोलती कहानियां

कहानी संग्रह : चिट्टी जनानियां कथाकार :  राकेश तिवारी मूल्य  : 299 रुपए प्रकाशक :  वाणी प्रकाशन पुस्तक समीक्षा सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव अच्छी कहानी कलकल बहती नदी की तरह होती है, जो पाठकों को अपने साथ बहाती हुई ले चलती है। पाठक उसकी रौ में बहता जाता है, उसके किरदारों...

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बाज़ारवाद के घातक हमलों की कहानियां

चर्चित किताब कहानी संग्रह : आईएसओ 9000 लेखक  : जयनंदन मूल्य  : 380 रुपए (हार्ड कवर) प्रकाशक  : नेशनल पेपरबैक्स, दिल्ली सत्येंन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव जयनंदन संघर्षशील लोगों के कथाकार हैं। जयनन्दन मज़दूरों के बीच रहे हैं। उनकी ज़िन्दगी जी है। खुद भी मजदूर रहे हैं। इसलिए उनके दर्द को उनसे...

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मज़दूरों की पीड़ा को आवाज़ देने वाला उपन्यास ‘धर्मपुर लॉज’

चर्चित किताब उपन्यास : धर्मपुर लॉज लेखिका : प्रज्ञा प्रकाशक :  लोकभारती प्रकाशन मूल्य : 200 रुपए सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव मज़दूरों की अंधेरी गंदी बस्ती में अब कोई कुछ नहीं बोलता एक अजीब सन्नाटे ने कफन की तरह ढांप लिया है पूरी बस्ती को जहां हर चीज भयावह लगती है।...

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शनि को परास्त करने वाले नायक की कहानी

उपन्यास : प्यार पर टेढ़ी नज़र : शनि लेखक : पंकज कौरव प्रकाशक : वाणी प्रकाशन मूल्य : 199 रुपए सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ज़िन्दगी में कामयाबी के लिए क्या चाहिए? मेहनत, किस्मत या दोनों? हर आदमी की ज़िन्दगी में कभी-कभी ऐसा पड़ाव आता है, जब वह खुद से यह सवाल...

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परिकथा का नववर्ष अंक

परिकथा का जनवरी-फरवरी 2020 अंक नववर्ष अंक है। इस अंक में अच्छी कहानी की अवधारणा और पहचान पर बहुत ही सार्थक परिचर्चा की गई है। कथाकार हरियश राय द्वारा संयोजित इस परिचर्चा में डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी, डॉ खगेंद्र ठाकुर, मधुरेश, राजेंद्र कुमार, विजय राय, जानकी प्रसाद शर्मा, तरसेम गुजराल, कर्मेंदु...

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बढ़ती अमानुिषकता पर केंद्रित ‘कथन’ का नया अंक

‘कथन’ का अंक 83-84 ‘बढ़ती अमानुषिकता से जूझती दुनिया’ विषय पर केंद्रित है। वर्तमान दौर में हिंसा, अमानुषीकरण, युद्धोन्माद जैसे जिन सवालों से हमारे देश में ही नहीं, दुनिया भर में लोग जूझ रहे हैं, उन सवालों पर महत्त्वपूर्ण सामग्री इस अंक में है। अंक में दिवंगत कवि मलखान सिंह...

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‘समावर्तन’:दिसंबर अंक प्रकाशित

कवि प्रदीप पर ‘एकाग्र’ के अंतर्गत निराला, सुमन, अभिनेता अशोक कुमार के आलेख। ‘रंगशीर्ष’ में वरिष्ठ छायाकार जगदीश कौशल पर सामग्री। ‘रेखांकित’ में इस बार युवा कवि अंचित की कविताएँ। शीला मिश्र की कहानी ‘आंदोलन’। प्रख्यात आलोचक डॉ धनंजय वर्मा से वरिष्ठ कथाकार संतोष चौबे, मुकेश वर्मा और महेंद्र गगन...

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व्यंग्य यात्रा का जुलाई-सितंबर 2019 अंक

हरिशंकर राढ़ी व्यंग्य जगत में सार्थक हस्तक्षेप रखने वाली त्रैमासिकी ‘व्यंग्य यात्रा’ का नया अंक अपने भरेपूरे आकार और चिर-परिचित कलेवर के साथ आया है। सदा की भांति इस अंक में चिंतन, त्रिकोणीय पद्य और गद्य व्यंग्य, पुस्तकों की चर्चा और समीक्षा के साथ अनेक रपटें हैं। त्रिकोणीय में इस...

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समहुत का अक्टूबर-दिसंबर अंक

हिंदी सिनेमा के विख्यात कवि, गीतकार, फिल्म निर्माता शैलेन्द्र की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते डॉ.इंद्रजीत सिंह-जनकवि शैलेन्द्र। शैलेन्द्र:’इप्टा’ के गीतकार-शैलेन्द्र के निकट रहे रमेश चौबे के साथ विख्यात कथाकार बृजमोहन की अंतरंग बातचीत, दुर्लभ चित्रों के साथ। शैलेन्द्र पर लिखी किताब:’धरती कहे पुकार के।’ हिंदी रंगमंच की दशा और...

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साहित्य को नई आधार शक्ति देती है ‘दोआबा’

‘दोआबा’ (पत्रिका) / संपादक : जाबिर हुसेन / प्रकाशक : दोआबा प्रकाशन / 247 एम आई जी, लोहियानगर, पटना-800020 / मूल्य : 75 रुपए / संपादकीय संपर्क : doabapatna@gmail.com, 09431602575 शहंशाह  आलम ख्यात साहित्यकार जाबिर हुसेन के संपादन में निकल रही पत्रिका ‘दोआबा’ का इकतीसवाँ अंक साहित्य के समकालीन प्रसंग...

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अंधेरे से लड़ने की ताक़त देने वाली कविताएं

समीक्षित पुस्तक – तनी हुई मुट्ठियाँ (कविता संग्रह)  कवि – रमेश यादव प्रकाशक –कनक प्रकाशन प्रकाशन वर्ष – 2019, मूल्य – 400 रुपये      आनन्द गुप्ता रमेश यादव युवा कविता में नया नाम हैं। ‘तनी हुई मुट्ठियाँ’ उनका दूसरा काव्य संग्रह है।  सबसे पहले इस संग्रह का शीर्षक हमारा ध्यान खींचता...

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स्त्री कथाकारों का ईमानदार मूल्यांकन

पत्रिका: लमही हमारा कथा समय विशेषांक, खंड एक प्रधान: संपादक विजय राय मूल्य: 50 रुपए पता: 3/343, विवेक खंड, गोमतीनगर, लखनऊ-226010 मोबाइल: 9454501011 सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका लमही का नया अंक (अप्रैल-सितम्बर संयुक्तांक) हर उस पाठक के लिए एक दुर्लभ उपहार की तरह है, जिसकी दिलचस्पी कहानियों में...