Category: पत्रिका

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परिकथा का नववर्ष अंक

परिकथा का जनवरी-फरवरी 2020 अंक नववर्ष अंक है। इस अंक में अच्छी कहानी की अवधारणा और पहचान पर बहुत ही सार्थक परिचर्चा की गई है। कथाकार हरियश राय द्वारा संयोजित इस परिचर्चा में डॉ विश्वनाथ त्रिपाठी, डॉ खगेंद्र ठाकुर, मधुरेश, राजेंद्र कुमार, विजय राय, जानकी प्रसाद शर्मा, तरसेम गुजराल, कर्मेंदु...

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बढ़ती अमानुिषकता पर केंद्रित ‘कथन’ का नया अंक

‘कथन’ का अंक 83-84 ‘बढ़ती अमानुषिकता से जूझती दुनिया’ विषय पर केंद्रित है। वर्तमान दौर में हिंसा, अमानुषीकरण, युद्धोन्माद जैसे जिन सवालों से हमारे देश में ही नहीं, दुनिया भर में लोग जूझ रहे हैं, उन सवालों पर महत्त्वपूर्ण सामग्री इस अंक में है। अंक में दिवंगत कवि मलखान सिंह...

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‘समावर्तन’:दिसंबर अंक प्रकाशित

कवि प्रदीप पर ‘एकाग्र’ के अंतर्गत निराला, सुमन, अभिनेता अशोक कुमार के आलेख। ‘रंगशीर्ष’ में वरिष्ठ छायाकार जगदीश कौशल पर सामग्री। ‘रेखांकित’ में इस बार युवा कवि अंचित की कविताएँ। शीला मिश्र की कहानी ‘आंदोलन’। प्रख्यात आलोचक डॉ धनंजय वर्मा से वरिष्ठ कथाकार संतोष चौबे, मुकेश वर्मा और महेंद्र गगन...

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व्यंग्य यात्रा का जुलाई-सितंबर 2019 अंक

हरिशंकर राढ़ी व्यंग्य जगत में सार्थक हस्तक्षेप रखने वाली त्रैमासिकी ‘व्यंग्य यात्रा’ का नया अंक अपने भरेपूरे आकार और चिर-परिचित कलेवर के साथ आया है। सदा की भांति इस अंक में चिंतन, त्रिकोणीय पद्य और गद्य व्यंग्य, पुस्तकों की चर्चा और समीक्षा के साथ अनेक रपटें हैं। त्रिकोणीय में इस...

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समहुत का अक्टूबर-दिसंबर अंक

हिंदी सिनेमा के विख्यात कवि, गीतकार, फिल्म निर्माता शैलेन्द्र की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते डॉ.इंद्रजीत सिंह-जनकवि शैलेन्द्र। शैलेन्द्र:’इप्टा’ के गीतकार-शैलेन्द्र के निकट रहे रमेश चौबे के साथ विख्यात कथाकार बृजमोहन की अंतरंग बातचीत, दुर्लभ चित्रों के साथ। शैलेन्द्र पर लिखी किताब:’धरती कहे पुकार के।’ हिंदी रंगमंच की दशा और...

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साहित्य को नई आधार शक्ति देती है ‘दोआबा’

‘दोआबा’ (पत्रिका) / संपादक : जाबिर हुसेन / प्रकाशक : दोआबा प्रकाशन / 247 एम आई जी, लोहियानगर, पटना-800020 / मूल्य : 75 रुपए / संपादकीय संपर्क : doabapatna@gmail.com, 09431602575 शहंशाह  आलम ख्यात साहित्यकार जाबिर हुसेन के संपादन में निकल रही पत्रिका ‘दोआबा’ का इकतीसवाँ अंक साहित्य के समकालीन प्रसंग...

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स्त्री कथाकारों का ईमानदार मूल्यांकन

पत्रिका: लमही हमारा कथा समय विशेषांक, खंड एक प्रधान: संपादक विजय राय मूल्य: 50 रुपए पता: 3/343, विवेक खंड, गोमतीनगर, लखनऊ-226010 मोबाइल: 9454501011 सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका लमही का नया अंक (अप्रैल-सितम्बर संयुक्तांक) हर उस पाठक के लिए एक दुर्लभ उपहार की तरह है, जिसकी दिलचस्पी कहानियों में...

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शिक्षा की दशा और दिशा पर केंद्रित जरूरी अंक

चर्चित पत्रिका कथन संपादक संज्ञा उपाध्याय सहयोग राशि 100 रुपए पता 107, साक्षरा अपार्टमेंट, ए-3, पश्चिम विहार, नई दिल्ली 110063 फोन –011 25268341 सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव अच्छी शिक्षा और बेहतर इलाज—ये 2 ऐसी चीजें हैं, जो इस देश के गरीब और निम्नमध्य वर्ग की पहुंच से बाहर निकल चुकी हैं।...

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समकालीन कविता का महत्वपूर्ण दस्तावेज : दिल्ली की सेल्फी कविता विशेषांक

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव लड़ना था हमें भय, भूख और भ्रष्टाचार के खिलाफ हम हो रहे थे एकजुट आम आदमी के पक्ष में पर उनलोगों को नहीं था मंजूर यह। उन्होंने फेंके कुछ ऐंठे हुए शब्द हमारे आसपास और लड़ने लगे हम आपस में ही! वे मुस्कुरा रहे हैं दूर खड़े...