Category: LEAD 1

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पल्लवी मुखर्जी की 8 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी पृथ्वी          जब भी बादल घुमड़ते हैं पैर टिकता नहीं है घर पर घूरते घर को छोड़कर निकल पड़ती हूँ और चलती जाती हूँ सड़क पर टिप-टिप बूंदों के साथ कुछ बूंदें हथेली से उछाल देती हूँ जैसे बादल को लौटा रही हूँ उसका प्रेम...

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ग़ज़ल का क़द मनुष्यता से तो ऊँचा नहीं

ओम निश्चल हिंदी के सुपरिचित कवि, गीतकार एवं आलोचक। ‘शब्‍द सक्रिय हैं'(कविता संग्रह) एवं ‘शब्‍दों से गपशप'(आलोचना),  ‘भाषा की खादी'(निबंध) सहित भाषा व आलोचना-समीक्षा की अनेक कृतियां प्रकाशित। अज्ञेय सहित कई कवियों के कविता-चयन, अधुनांतिक बांग्ला कविता एवं कुंवर नारायण पर केंद्रित आलोचनात्‍मक पुस्‍तक ‘अन्‍वय’ एवं ‘अन्‍विति’ का संपादन। उत्तर...

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केशव शरण की 5 ग़ज़लें

केशव शरण प्रकाशित कृतियां-तालाब के पानी में लड़की  (कविता संग्रह), जिधर खुला व्योम होता है  (कविता संग्रह), दर्द के खेत में  (ग़ज़ल संग्रह), कड़ी धूप में (हाइकु संग्रह), एक उत्तर-आधुनिक ऋचा (कवितासंग्रह), दूरी मिट गयी  (कविता संग्रह), क़दम-क़दम ( चुनी हुई कविताएं ) , न संगीत न फूल ( कविता संग्रह), गगन नीला धरा धानी नहीं है (...

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आलोक कुमार मिश्रा की 4 कविताएं

आलोक कुमार मिश्रा  1-आँखों की मशाल अपनी बेटी को  सिखा रहा हूँ आँख मारना जिससे वो एक झटके में ही  ध्वस्त कर दे उसे घेरने वाली मर्दवादी किलेबंदी उसे सिखा रहा हूँ आँखें मटकाना  कि वो देख सके तीन सौ साठ डिग्री और भेद सके  चक्रव्यूह के सारे द्वार उससे...

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रमेश उपाध्याय की कहानी ‘काठ में कोंपल’

रमेश उपाध्याय सम्मान गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार (केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा), साहित्यिक पत्रकारिता पुरस्कार (वनमाली सृजनपीठ, भोपाल), ‘नदी के साथ’ (उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा पुरस्कृत), ‘किसी देश के किसी शहर में’, ‘डॉक्यूड्रामा तथा अन्य कहानियाँ’ (दोनों पुस्तकें हिंदी अकादमी, दिल्ली द्वारा पुरस्कृत) संपर्क 107, साक्षरा अपार्टमेंट्स, ए-3, पश्चिम...

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अनुपमा तिवाड़ी की 2 कविताएं

अनुपमा तिवाड़ी ए – 108, रामनगरिया जे डी ए स्कीम,  एस के आई टी कॉलेज के पास, जगतपुरा, जयपुर 302017  मुझे बहुत कुछ हो जाना है मुझे पेड़ों से प्यार करते हुए, एक दिन पेड़ हो जाना है मुझे नदी से प्यार करते हुए, एक दिन नदी हो जाना है...

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मोहन कुमार झा की 3 कविताएं

मोहन कुमार झा अररिया, बिहार सम्प्रति अध्ययनरत् काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मो. 78390450071. हारे हुए लोग अच्छा होता है बेहतर चुननामगर उससे भी अच्छा होता है सबसे बेहतर चुननासिर्फ जीतने वाले नहींहारे हुए लोग भी अच्छे होते हैं। ख्वाब बगैर नींद के भी देखी जा सकती हैआदमी को बनाया जा सकता है देवताएक पल में...

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शालिनी मोहन की 4 कविताएं

शालिनी मोहन विभिन्न राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित। ‘अहसास की दहलीज़ पर’ साझा काव्य संग्रह के. जी. पब्लिकेशन द्वारा  2017 में प्रकाशित .  रश्मि प्रकाशन, लखनऊ से कविता संग्रह ‘दो एकम दो’ वर्ष 2018 में प्रकाशित.   वर्तमान पता फ्लैट नं 402 वंदना रेसिडेंसी अपार्टमेंट मनीपाल काउन्टी रोड सिंगसान्द्रा बंगलुरू(कर्नाटक)-560068  ...

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बांदा की आबोहवा में कविता का अक्स

पिछले रविवार, सात अप्रैल को राजकीय महिला डिग्री कालेज बाँदा में जनवादी लेखक मंच, बाँदा और लोकोदय प्रकाशन की ओर से समकालीन कविता पाठ और परिचर्चा का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अधिवक्ता संघ, बाँदा के अध्यक्ष श्री सुबीर सिंह  ने की और संचालन जनवादी लेखक...

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एंटन चेखव की कहानी ‘एक कलाकृति’

सुशान्त सुप्रिय नाम : सुशांत सुप्रियजन्म : 28 मार्च , 1968शिक्षा : एम.ए.(अंग्रेज़ी ), एम . ए.  ( भाषा विज्ञान ) : अमृतसर ( पंजाब ) , व दिल्ली में । प्रकाशित कृतियाँ :—————–# हत्यारे ( 2010 ) , हे राम ( 2013 ) , दलदल ( 2015 ) , ग़ौरतलब कहानियाँ( 2017 ) , पिता के नाम ( 2017 , मैं कैसे हँसूँ ( 2019 ) : छह कथा–संग्रह । # इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं ( 2015 ) , अयोध्या से गुजरात तक ( 2017...

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2020 के मानबहादुर सिंह लहक सम्मान की घोषणा

कोलकाता से प्रकाशित चर्चित पत्रिका ‘लहक’ 2020 के लिए मानबहादुर सिंह लहक सम्मान की घोषणा कर दी है। अगले वर्ष ये सम्मान मधुरेश और कांति कुमार जैन को प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान है, पुरस्कार नहीं। न ही इसमे किसी तरह की रचनाएँ आमन्त्रित की जाती हैं, न चयन की...

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श्रीधर करुणानिधि की 6 कविताएं

श्रीधर करुणानिधि जन्म पूर्णिया जिले के दिबरा बाजार गाँव में शिक्षा- एम॰ ए॰(हिन्दी साहित्य) स्वर्ण पदक,    पी-एच॰ डी॰, पटना  विश्वविद्यालय, पटना। प्रकाशित रचनाएँ-     विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। आकाशवाणी पटना से कहानियों का तथा दूरदर्शन, पटना से काव्यपाठ का प्रसारण। प्रकाशित पुस्तकें-1. ’’वैश्वीकरण और हिन्दी का बदलता हुआ स्वरूप‘‘(आलोचना...

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सुशांत सुप्रिय की कहानी ‘लाश’

सुशान्त सुप्रिय A-5001 ,गौड़ ग्रीन सिटी ,वैभव खंड ,इंदिरापुरम ,ग़ाज़ियाबाद – 201014( उ. प्र. )मो: 8512070086ई–मेल: sushant1968@gmail.com घर के ड्राइंगरूम में उनकी लाश पड़ी हुई है  । उनकी मृत्यु से मुझे गहरा झटका लगा है ।  मैं सदमे में हूँ । बुझा हुआ हूँ ।  मेरी वाणी को जैसे लकवा मार गया है ।  हाथ–  पैरों में जैसे जान ही नहीं रही ।  आँखों में जैसे किसी ने ढेर सारा अँधेरा झोंक दिया है ।  वे नहीं गए । ऐसा लगता है जैसे मेरा सब कुछ चला गया है । जैसे मेरी धमनियों और शिराओं में से रक्त चला गया है । जैसे मेरे शरीर में से मेरी आत्मा चली गई है । जैसे मेरे आसमान से सूरज, चाँद और सितारे चले गए हैं । सुबहका समय है लेकिन इस सुबह के भीतर रात की कराहें दफ़्न हैं ।  लगता है जैसे मेरे वजूद की किताब के पन्ने फट कर समय की आँधी में खो जाएँगे … मेरे घर में मेरी पत्नी , मेरा बेटा और मेरी बेटी रहते हैं । और हमारे साथ रहते थे वे । वे मेरे यहाँ तब से थे जब से मैंने इस घर में आँखें खोली थीं । बल्कि इस से भी कहीं पहले से वे हम सब के बीच थे । मेरे पिताजी , दादाजी — सब उनकीइज़्ज़त करते थे ।  वे हमारे यहाँ ऐसे रहते थे जैसे भक्त के दिल में भगवान रहते हैं ।  जैसे बादलों में बूँदें रहती हैं ।  जैसे  सूर्य की किरणों में ऊष्मा रहती है । जैसे इंद्रधनुष में रंग रहते हैं । जैसे फूलों में पराग रहता है । जैसे पानी में मछली रहती है। जैसे पत्थरों में आग रहती है । जैसे आँखों में पहचान रहती है … उनकी उँगली पकड़ कर ही मैं जीवन में दाख़िल हुआ था । मेरी सौभाग्यशाली उँगलियों ने उन्हें छुआ था । पिताजी, दादाजी — सब ने हमारे जीवन में उनके महत्व के बारे में हमें बार–बार  समझाया  था ।  उनका  साथ मुझे अच्छा लगता था ।उनकी गोदी में बैठकर मैंने सच्चाई और ईमानदारी का पाठ पढ़ा । उनकी छाया में मैंने जीवन को ठीक से जीना सीखा । सही और ग़लत का ज्ञान उन्होंने ही मुझे करवाया था ।  और मैं इसे कभी नहीं भूला । उनके दिखाए मार्ग पर चल कर ही मैंआज जहाँ हूँ , वहाँ पहुँचा । फिर मेरी शादी हो गई । और यहाँ से मेरे जीवन में मुश्किलों ने प्रवेश किया । मेरी पत्नी पढ़ी–लिखी किंतु बेहद महत्वाकांक्षी थी ।  उसकी  मानसिकता  मुझसे अलग  थी ।  वह  जीवन में सफल होने के लिए किसी भी हद तक जा सकती थी । और ‘ सफलता ‘ की उसकी परिभाषा भी मेरी परिभाषा से बिलकुल मेल नहीं खातीथी । झूठ बोलकर , फ़रेब करके , दूसरों का हक़ मार कर आगे  बढ़ने को भी वह जायज़ मानती थी । उसके लिए अवसरवादिता ‘ दुनियावी ‘ होने का दूसरा नाम था ।  ज़ाहिर है , मेरी पत्नी को उनका साथ पसंद नहीं था क्योंकि वे तो छल–कपट से कोसों दूर थे । फिर मेरे जीवन में मेरे बच्चे आए । एक फूल–सा बेटा और एक इंद्रधनुष–सी  बेटी ।  मेरी    ख़ुशी  की  कोई सीमा नहीं रही । मैंने चाहा कि मेरे बच्चे भी उनसे सही जीवन जीने की शिक्षा ग्रहण करें । जीवन में सही और ग़लत को पहचानें । उनके द्वारासिखाए गए मूल्यों और आदर्शों का दामन थाम लें । किंतु ऐसा हो न सका । बच्चे अपनी माँ पर गए । उन्होंने जो सीखा , अपनी माँ से ही सीखा । इन बीजों में मैं पर्याप्त मात्रा में अच्छे संस्कारों की खाद न मिला पाया । बुराई को नष्ट कर देनेवाले कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं कर पाया । नतीजा यह हुआ कि इन पौधे–रूपी बच्चों में बुराई का कीड़ा लग गया ।  मेरे बच्चे उनकी  अच्छाइयों से कुछ न सीख सके । जब मैं घर में नहीं होता , वे घर के एक कोने में उपेक्षित–से  पड़े  रहते ।  मेरे बीवी –बच्चे उनसे...

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आज के समय में ब्रेख्त

पटना के महाराजा कांप्लेक्स में स्थित टेक्नो हेराल्ड में साहित्यिक संस्था ‘जनशब्द’ द्वारा जर्मन के प्रसिद्ध कवि बरतोल्ट ब्रेख़्त पर केंद्रित समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित था। पहला सत्र ‘आज के समय में ब्रेख़्त’, जबकि दूसरा सत्र ब्रेख़्त को समर्पित कवि-सम्मेलन का था। कार्यक्रम...