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जिंदगी से अथक जंग की कहानियाँ

शैलेंद्र शांत   पुस्तक समीक्षा यह कोलकाता के कथाकार उदयराज जी की किताब के बाबत चंद बातें हैं। कहानियों की किताब, जिसमें छोटी-बड़ी कुल 17 कहानियां दर्ज हैं। लेखक की किताब का नाम “आरंभ” है, जो किताब के मामले में आरंभ ही है, यानी पहली किताब। उम्मीद की जाए कि...

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मौजूदा समय से मुठभेड़ करती कहानियां

दिनांक 6 अप्रैल, 2019 को कथा- कहानी की गोष्ठी गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली में आयोजित की गई. इस गोष्ठी में वरिष्‍ठ कथाकार रमेश उपाध्याय ने अपनी कहानी ‘काठ में कोंपल’ व रचना त्‍यागी ने अपनी कहानी ‘ काला दरिया’ का पाठ किया.  रमेश उपाध्याय की कहानी पर बोलते हए...

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अरुण कुमार की 4 कविताएं

अरुण कुमार विचार विचारशून्य नहीं था मैं, सदियों से कौंधते रहे मेरे मन में, विचार तुम्हारी मनुवादी व्यवस्था के खिलाफ, मगर मेरे शब्दों को दबा दिया गया हजारों वर्षों के शोषण में, अछूत कहकर कुचल दिया गया मेरे वजूद को, ब्राह्मणवादी संस्कारों ने और थमा दिया गया झुनझुना मुझे जाति...

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अमित कुमार मल्ल की 5 कविताएं

अमित कुमार मल्ल जन्म स्थान – देवरिया शिक्षा – स्नातक (दर्शन शास्त्र , अंग्रेजी साहित्य , प्राचीन इतिहास व विधि  ), परास्नातक ( हिन्दी साहित्य ) सम्प्रति  –  सेवारत रचनात्मक उपलब्धियां- प्रथम काव्य संग्रह – लिखा नहीं एक शब्द , 2002 में प्रकाशित । प्रथम लोक कथा संग्रह – काका...

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शहंशाह आलम के कविता संग्रह ‘थिरक रहा देह का पानी’ से 5 कविताएं

तीली आपके पास कितना कुछ बचा है अब भी जीने के लिए कई सदियां मेरे पास एक तीली बची है माचिस की आपके अंधेरे कोने को रौशन करने के लिए यह तीली बचाए रखना चाहूंगा उसके प्रेम के बचे रहने तक 2. मुझ में मैने देखा मेरे अंदर एक नदी...

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शशांक पांडेय की 7 कविताएं

शशांक पांडेय सुभाष लाँज, छित्तुपुर, बी.एच.यू, वाराणसी(221005) ● मो.नं-09554505947 ● ई.मेल-shashankbhu7@gmail.com 1. खिड़कियाँ मैंने बचपन में ऐसे बहुत से घर बनाएं और फिर गिरा दिए जिनमें खिड़कियाँ नहीं थीं दरवाजें नहीं थे बाकी सभी घरों की तरह उस घर में  मैंने सबकुछ लगाए थे लेकिन फिर भी  दुनिया को साफ-साफ...

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सतीश खनगवाल की 3 कविताएं

सतीश खनगवाल जन्मतिथि – 18 अक्टूबर 1979 (दस्तावेजी)जन्मस्थान – रायपुर अहीरान, झुनझुनूं (राजस्थान)सम्प्रति – प्राध्यापक, शिक्षा निदेशालय, दिल्ली।कृतियाँ – सुलगता हुआ शहर (कविता – संग्रह), विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख, लघुकथाएँ, व्यंग लेख, समीक्षाएँ, आदि प्रकाशित।      वह भी मुरझा जाता है     मुझे देखते ही     उसका पीला पड़ा चेहरा    ...