Category: कविता

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राजेश’ललित’ की कविताएं

बुद्ध मैं आत्मा घर रख आया बस यूँ ही शरीर  लेकर निकल पड़ा कभी इस डगर कभी उस नगर आत्मा साफ़ हो तो ठीक बाहर रोगी हैं वृद्ध हैं बाहर निष्प्राण हैं मैं कोई बुद्ध नहीं कोई वट वृक्ष नहीं हाँ,पत्नी को बता आया वो साफ़ रखेगी आत्मा संदूक में...

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डॉ नितेश व्यास की कविताएं

शब्द का सपना कविता में जीवन के ढंग को तलाशता हूं मैं खोजता हूं शब्दों में इन्द्र धनुष के बाहर‌ का कोई रंग कोई ऐसी वर्णमाला जिसे पहनकर मैं अदृश्य हो सकूं मैं एक आरामदायक कमरा खोजता हुआ कविता की पुस्तक तक पहुंच जाता हूं मैं ढूंढता हूं एक गोद...

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बच्चों के लिए राम करन की कविताएं

बादल! आना मेरे गाँव बरगद बाबा खड़े मिलेंगे, जटा-जूट से बढ़े मिलेंगे। झुककर छूना उनके पांव, बादल! आना मेरे गाँव। पके रसीले आम मिलेंगे, लँगड़ा, बुढ़वा नाम मिलेंगे। और मिलेगी पीपल छाँव, बादल! आना मेरे गाँव। घर-घर ठाड़े नीम मिलेंगे, दातुन लिए हक़ीम मिलेंगे। चिड़ियां करती ‘ची-ची-चांव’, बादल! आना मेरे...

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स्मिता सिन्हा की कविताएं

आत्महंता वे बड़े पारंगत थे  बोलने में   चुप रहने में   हँसने में  रोने में  उन्होंने हमेशा  अपने हिस्से का  आधा सच ही कहा  और अभ्यस्त बने रहे  एक पूरा झूठ रचने में  अपनी इसी तल्लीनता में  वे अंत तक  इस सत्य से अनजान रहे की  उन्हीं के प्रहारों...

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नताशा की कविताएं

अव्यक्त मेरे आस-पास प्रेम पड़ा था रस में गन्ध में छाया में  मेरे पकड़ने की चाह में जिह्वा बेस्वाद रही श्वास बेपरवाह धूप में सारे पेड़  अन्त: झुलस गये ! छाया मेरा पता पूछती वह  थक सी गई है  साथ चलते-चलते  धूप के अन्तिम ठिकाने पर  हेरती है मचान  मुझसे...

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राज्यवर्द्धन की प्रेम कविताएं

प्रेमपत्र दुनिया की सबसे उत्कृष्ट रचना  है- प्रेमपत्र! धरती पर सबसे ज्यादा जीवंत रचना है- प्रेम पत्र ! जब कोई प्रेम-पत्र रचता है जब कोई प्रेम-पत्र पढ़ता है लिखते -पढ़ते वक्त तन-मन  में अदृश्य परमाणु महाविस्फोट सा बहुत कुछ घटित होता है कान सुर्ख हो जाते हैं पार्श्व में राग...

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पल्लवी मुखर्जी की कविताएं

प्रेम उसने सिर्फ़ उसकी आँखों को देखा था जिसमें वह हँसती हुई दूर तक नदी बनती जा रही थी वह लौटना नहीं चाहती थी जैसे लौट जाता है बादल बिना बरसे वह  बहना चाहती थी बहते-बहते किसी तट पर रुकने की मंशा नहीं थी उसकी वह बन रही थी तितली...

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पारुल तोमर की कविताएं

देवी नहीं बनना है मुझे एक आग्रहपूर्ण आमंत्रण और नौ दिन का उत्सव आंनद आम्रपत्र, जलकलश मौली और आलता से सजा लाल कपड़े से लिपटा नारियल दसवें दिन भेंट चढ़ जाता है रीति और परंपराओं के नाम पर गुलाब की सूखी पँखुरियों से बिखर जाते हैं सारे स्वप्न और आशाएँ...

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अमरीक सिंह दीप की कविताएं

तकदीर कोई नहीं लिखता तकदीर कोई नहीं लिखतान आसमान पर बैठा  ईश्वरन चित्रगुप्तन कोई अन्य देवी देवतासड़क पर झाडू लगाने वालोंसिर पर झल्ली ढोने वालोंखेत में हल चलाने वालोंखदानों में कोयला खूंदने वालोंधमन भट्ठियों में लोहा गलाने वालोंअथक श्रम  से रोटी कमाने वालों सुनोतकदीर  सिर्फ  एक  शब्द  हैसम्राटों की चरणवंदना...

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अरुण सिंह की कविताएं

उत्तराधिकार उस दिन बनती हुई इमारत सेमज़दूर नहीं गिरा था,गिरी थी मजबूरी। तब मज़दूर की कमर टूटी थी,छितरा गया था वह जामुन की तरहज़मीन पर पच्च् से;लेकिन मजबूरी का कुछनहीं बिगड़ा तब भी,जिस दिन गिरा था वहउसी के अगले दिन सेउसी ऊँचाई परखड़ा हो गया थाउसका उत्तराधिकारीअगली बार जामुन बनने...

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अनुपमा तिवाड़ी की कविताएं

ये कविताएं बहुत छोटी-छोटी हैं लेकिन इनका असर सीधे दिल पर होता है। पढ़कर महसूस कीजिए। 1.मन, पता नहीं क्यों कभी-कभी,मन, मन हुआ जाता है 2.लम्हे रास्ते में रोक पूछते हैंमेरा हाल मैं नज़रें चुरा कर निकल जाती हूँ— 3.सब पत्थरों से मकान नहीं बनतेफिर भी हम कितनी ही बारबेवजह पत्थर उठाते रहते...

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सुभाष झा की कविताएं

शौच से शमशान तक खुले में शौच करने वाले लगातार कम हो रहे हैं मुखिया जी ने ‘खुले में शौच मुक्त’ का बोर्ड बनवा लिया है रबी की फ़सलें अब पक चुकी हैं उनकी कटाई चालू है प्रशासन ने आस-पास के गाँवों के चौक-हाटों को निषेध कर दिया है शमशान...

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डॉ नितेश व्यास की कविताएं

कविता पर कुछ कविताएं (अ) वह नहीं होती कोई इश्तिहार जिसे फाड़ सके उड़ा ले जा सके मौसमी हवाएं वह तो है काल के भाल पर  उत्कीर्ण दस्तावेज़ सांस लेते हुए। (आ) काल-अकाल घिरने वाली बूंदा-बांदी नहीं है वह, है गर्जना युक्त मूसलाधार जो रखती है युगों को धो देने...

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सिमन्तिनी रमेश वेलुस्कर की कविताएं

1. कठिनतम परिस्थितियों में जब मुट्ठी भर संवेदनशील लोग शर्म से गड़े जा रहे हैं पांच हज़ार बरसों में लगभग चौदह हज़ार युद्धों का इतिहास चीख़ चीख़ कर कह रहा है कोई राजा आज तक शर्म से नहीं मरा 2. चैत और फागुन के बीच के मौसम में जब चलती...

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डॉ शंभुनाथ की कविताएं

भूख पर 2 कविताएं भूख में सपने बहुत आते हैं भूख का नामोनिशान नहीं होताविज्ञापनों के संसार मेंमॉल में भी वह चर्चा के बाहर हैकंपनियों के व्यापार कोश में नहीं है यह शब्दबाहर है कैफे से संसद सेशिखर वार्ताओं से भी पूरी तरह बाहरभूख फैल रही है शहर-शहरभूख में फैल...

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केशव शरण की कविताएं

उत्तरोत्तर विकास सैकड़ों को डुबोया गया हज़ारों के विकास के लिए एक दिन हज़ारों भी डूब गये लाखों के विकास के लिए अब करोड़ों के विकास के लिए सोचा जा रहा है 2. कल कौन-से देवता का दिन? भरी कटोरियां और कलश लेकर मंदिर जाते हुए उसे देख रहे थे...

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डॉ कुन्दन सिंह की 5 कविताएं

शिकारी शहर शहर शिकारी हो गया हैमारता है झपट्टाऔर लील जाता हैगांव-गिरांव के लड़केकि गांव के गांववीरान पड़ते जा रहेबचे हैं बसबूढ़े निस्साहाय असमर्थखेत खलिहान से दुआर दलान तकपसरी पड़ी है चुप्पी ! शिकारी शहर ने कर लिया है रुखअब खुद ही गांव की ओरनये शिकार की तलाश मेंभूख बड़ी...

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अनामिका अनु की 10 कविताएं

1. तथाकथित प्रेम अलाप्पुझा रेलवे स्टेशन पर, ईएसआई अस्पताल के पीछे जो मंदिर है वहाँ मिलते हैं, फिर रेल पर चढ़कर दरवाजे पर खड़े होकर, हाथों में हाथ डालकर बस एक बार जोर से हँसेंगे, बस इतने से ही बहती हरियाली में बने ईंट और फूस के घरों से झाँकती...

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डॉ सुनील कुमार की 2 कविताएं

आग की खोज उन बस्तियों के लिए आग की खोज एक जुगुनू के द्वारा हुई इतना घुप्प अंधेरा था सदियों से एक जुगनू भी उन्हें विशालकाय सूरज सा लगने लगा उसे देख कर सदियों की अंधेरी बस्तियों को आग का एहसास हुआ उन्हें भी गर्माहट सी होने लगी विचारों की...