Category: कविता

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कैलाश मनहर की 5 कविताएं

1. कविता का सूना कोना नींद और उनींद के बीच किसी उबासी में से निकल कर नाम और ईनाम की गुत्थियों के जाल में फँसती रही और बिगड़े हुए रूप पर अपने ही अवसाद और उन्माद के अँधेरों और चकाचौंध में कभी रोती रही कभी हँसती रही विभ्रमित अपनी कंटकाकीर्ण...

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अरुण शीतांश की 3 कविताएं

अरुण शीतांश जन्म  02.11.1972अरवल जिला के विष्णुपुरा गाँव में शिक्षा –एम ए ( भूगोल व हिन्दी)एम लिब सांईसएल एल बी पी एच डी कविता संग्रह  १. एक ऐसी दुनिया की तलाश में २. हर मिनट एक घटना है ३.पत्थरबाज़आलोचना४.शब्द साक्षी हैं सम्मान –           शिवपूजन सहाय सम्मानयुवा शिखर साहित्य सम्मान पत्रिकादेशज नामक पत्रिका का संपादन  संप्रति शिक्षण...

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पल्लवी मुखर्जी की 5 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी शब्द मरते नहीं मेंरे भीतर की आग का थोड़ा सा हिस्सा लेकर तुमने सुलगाई जीवन की लौ बाकि बचे हुए आग की आँच को हवा देती हूँ मैं उसकी लौ पर उबलते हैं शब्द शब्दों की भाषा को पढ़ते हो तुम शब्द मिट्टी में मिलने से पहले एक...

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राहुल कुमार बोयल की 4 कविताएं

राहुल कुमार बोयल जन्म दिनांक- 23.06.1985जन्म स्थान- जयपहाड़ी, जिला-झुन्झुनूं( राजस्थान)सम्प्रति- राजस्व विभाग में कार्मिकपुस्तक- समय की नदी पर पुल नहीं होता (कविता संग्रह)            नष्ट नहीं होगा प्रेम ( कविता संग्रह) मोबाइल नम्बर- 7726060287 ई मेल पता- rahulzia23@gmail.com1. अंगुलियों का धर्म मेरे पास तुम्हारी एक अँगूठी है इसलिए नहीं कि...

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संजीव ठाकुर की कविता ‘प्रेमिका की याद’

संजीव ठाकुर प्रेमिका की याद  1 प्रेमिका की याद मजबूत खूँटी टाँगकर खुद को हुआ जा सकता है निश्चिंत । 2 प्रेमिका की याद शहद में डूबा तीर बार–बार खाने का मन करे । 3 प्रेमिका की याद बरसाती नदी नहीं होती प्रेमिका की याद बूँदा–बाँदी भी नहीं प्रेमिका की...

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धर्मपाल महेंद्र जैन की 4 कविताएं

धर्मपाल महेंद्र जैन जन्म : 1952, रानापुर,  जिला – झाबुआ (म. प्र.), भारत,  स्थायी निवास – टोरंटो, कनाडा शिक्षा : भौतिकी; हिन्दी एवं अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर प्रकाशन :  पाँच सौ से अधिक कविताएँ व हास्य-व्यंग्य प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। “दिमाग़ वालों सावधान” एवं “सर क्यों दाँत फाड़ रहा है?” (व्यंग्य संकलन) एवं “इस समय तक” (कविता संकलन) प्रकाशित। मुझे तुम्हें वह लौटाना है   मुझे...

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पवन कुमार मौर्य की 3 कविताएं

पवन कुमार मौर्य जन्मतिथि- 01 जून, 1993 शिक्षा– स्नातक-भूगोल (ऑनर्स) (बीएचयू, बनारस)  एमए जनसंचार-एमसीयू, भोपाल. पेशा- दिल्ली में पत्रकारिता पता –  वर्तमान – नोएडा स्थाई पता- जन्म- बनारस, अब जिला- चन्दौली गांव- मानिकपुर, पोस्ट- नौबतपुर, थाना-सैयदराजा पिन- 232110 सम्पर्क सूत्र- 9667927643 Email- mauryapavan563 @gmail.com 1-  तुम्हारे साथ हूं तुम्हारी अधूरी ख्वाहिशों...

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विजय राही की 5 कविताएं

विजय राही ग्राम-पोस्ट-बिलौना कला तहसील-लालसोट जिला-दौसा(राजस्थान) पिनकोड-303503 पेशे से सरकारी शिक्षक है। कुछ कविताएँ हंस,  मधुमती, दैनिक भास्कर,  राजस्थान पत्रिका, डेली न्यूज, राष्ट्रदूत में छपी। सम्मान-दैनिक भास्कर का युवा प्रतिभा खोज प्रोत्साहन पुरस्कार -2018 क़लमकार मंच का राष्ट्रीय कविता पुरस्कार(द्वितीय)-2019 मो.नं.-9929475744 Email-vjbilona532@gmail.com रोना   बड़े-बुजुर्ग कहते हैं मर्द का रोना...

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राहुल कुमार बोयल की 10 कविताएं

राहुल कुमार बोयल जन्म – 23.06.1985जन्म स्थान- जयपहाड़ी, जिला-झुन्झुनूं( राजस्थान)सम्प्रति- राजस्व विभाग में कार्मिक पुस्तक- समय की नदी पर पुल नहीं होता (कविता संग्रह) मोबाइल नम्बर- 7726060287 ई मेल पता- rahulzia23@gmail.com   1. मैं जानता हूँ____________ मैं उस किसान को जानता हूँ जिसके खेत में इतनी कपास होती हैकि रेशे से उसके फांसी का फंदा...

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पल्लवी मुखर्जी की 8 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी पृथ्वी          जब भी बादल घुमड़ते हैं पैर टिकता नहीं है घर पर घूरते घर को छोड़कर निकल पड़ती हूँ और चलती जाती हूँ सड़क पर टिप-टिप बूंदों के साथ कुछ बूंदें हथेली से उछाल देती हूँ जैसे बादल को लौटा रही हूँ उसका प्रेम...

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आलोक कुमार मिश्रा की 4 कविताएं

आलोक कुमार मिश्रा  1-आँखों की मशाल अपनी बेटी को  सिखा रहा हूँ आँख मारना जिससे वो एक झटके में ही  ध्वस्त कर दे उसे घेरने वाली मर्दवादी किलेबंदी उसे सिखा रहा हूँ आँखें मटकाना  कि वो देख सके तीन सौ साठ डिग्री और भेद सके  चक्रव्यूह के सारे द्वार उससे...

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अनुपमा तिवाड़ी की 2 कविताएं

अनुपमा तिवाड़ी ए – 108, रामनगरिया जे डी ए स्कीम,  एस के आई टी कॉलेज के पास, जगतपुरा, जयपुर 302017  मुझे बहुत कुछ हो जाना है मुझे पेड़ों से प्यार करते हुए, एक दिन पेड़ हो जाना है मुझे नदी से प्यार करते हुए, एक दिन नदी हो जाना है...

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मोहन कुमार झा की 3 कविताएं

मोहन कुमार झा अररिया, बिहार सम्प्रति अध्ययनरत् काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मो. 78390450071. हारे हुए लोग अच्छा होता है बेहतर चुननामगर उससे भी अच्छा होता है सबसे बेहतर चुननासिर्फ जीतने वाले नहींहारे हुए लोग भी अच्छे होते हैं। ख्वाब बगैर नींद के भी देखी जा सकती हैआदमी को बनाया जा सकता है देवताएक पल में...

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शालिनी मोहन की 4 कविताएं

शालिनी मोहन विभिन्न राष्ट्रीय, अन्तर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ प्रकाशित। ‘अहसास की दहलीज़ पर’ साझा काव्य संग्रह के. जी. पब्लिकेशन द्वारा  2017 में प्रकाशित .  रश्मि प्रकाशन, लखनऊ से कविता संग्रह ‘दो एकम दो’ वर्ष 2018 में प्रकाशित.   वर्तमान पता फ्लैट नं 402 वंदना रेसिडेंसी अपार्टमेंट मनीपाल काउन्टी रोड सिंगसान्द्रा बंगलुरू(कर्नाटक)-560068  ...

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अरुण कुमार की 4 कविताएं

अरुण कुमार विचार विचारशून्य नहीं था मैं, सदियों से कौंधते रहे मेरे मन में, विचार तुम्हारी मनुवादी व्यवस्था के खिलाफ, मगर मेरे शब्दों को दबा दिया गया हजारों वर्षों के शोषण में, अछूत कहकर कुचल दिया गया मेरे वजूद को, ब्राह्मणवादी संस्कारों ने और थमा दिया गया झुनझुना मुझे जाति...

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श्रीधर करुणानिधि की 6 कविताएं

श्रीधर करुणानिधि जन्म पूर्णिया जिले के दिबरा बाजार गाँव में शिक्षा- एम॰ ए॰(हिन्दी साहित्य) स्वर्ण पदक,    पी-एच॰ डी॰, पटना  विश्वविद्यालय, पटना। प्रकाशित रचनाएँ-     विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। आकाशवाणी पटना से कहानियों का तथा दूरदर्शन, पटना से काव्यपाठ का प्रसारण। प्रकाशित पुस्तकें-1. ’’वैश्वीकरण और हिन्दी का बदलता हुआ स्वरूप‘‘(आलोचना...

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अमित कुमार मल्ल की 5 कविताएं

अमित कुमार मल्ल जन्म स्थान – देवरिया शिक्षा – स्नातक (दर्शन शास्त्र , अंग्रेजी साहित्य , प्राचीन इतिहास व विधि  ), परास्नातक ( हिन्दी साहित्य ) सम्प्रति  –  सेवारत रचनात्मक उपलब्धियां- प्रथम काव्य संग्रह – लिखा नहीं एक शब्द , 2002 में प्रकाशित । प्रथम लोक कथा संग्रह – काका...

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शहंशाह आलम के कविता संग्रह ‘थिरक रहा देह का पानी’ से 5 कविताएं

तीली आपके पास कितना कुछ बचा है अब भी जीने के लिए कई सदियां मेरे पास एक तीली बची है माचिस की आपके अंधेरे कोने को रौशन करने के लिए यह तीली बचाए रखना चाहूंगा उसके प्रेम के बचे रहने तक 2. मुझ में मैने देखा मेरे अंदर एक नदी...

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शशांक पांडेय की 7 कविताएं

शशांक पांडेय सुभाष लाँज, छित्तुपुर, बी.एच.यू, वाराणसी(221005) ● मो.नं-09554505947 ● ई.मेल-shashankbhu7@gmail.com 1. खिड़कियाँ मैंने बचपन में ऐसे बहुत से घर बनाएं और फिर गिरा दिए जिनमें खिड़कियाँ नहीं थीं दरवाजें नहीं थे बाकी सभी घरों की तरह उस घर में  मैंने सबकुछ लगाए थे लेकिन फिर भी  दुनिया को साफ-साफ...

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पल्लवी मुखर्जी की कविता ‘औरत और चिड़िया’

पल्लवी मुखर्जी वह औरत तमाम दुःखों को रखती है संदूक के भीतर तह लगाकर फिर एक-एक कर उन्हें खोलती जाती है परत दर परत उनसे गुज़रती है और डूबती जाती है आँखों के समुद्र में गोते लगाती हुई किनारे पर मिल जाती है एक चिड़िया से औरत और चिड़िया एक...