Category: कहानी

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आदित्य अभिनव की कहानी ‘सुंदरी’

अबुल हसन यों तो था पाँचवक्ती नमाजी लेकिन उसका उठना-बैठना हिंदुओं के साथ था। उसके रग-रग में भारतीय सभ्यता और संस्कृति रची-बसी थी। उसे अपनी सभ्यता-संकृति से बड़ा प्यार था। उसकी दृष्टि में भारतीय संस्कृति के चार आधार ‘गंगा,गीता, गायत्री और गौ’ किसी धर्म विशेष यानी केवल हिंदू धर्म, जिसे...

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हरियश राय की कहानी ‘भंवर में…’

रेखांकन : संदीप राशिनकर चाहता तो वह गूगल के जनक सरगै ब्रिन की तरह बनना जिसकी वजह से गूगल दुनिया भर में मशहूर हो गया और जिसकी वजह से क्लास का हर बच्चा ‘’गूगल करो’’ या  ‘’गूगल कर लेना’’ या ‘’गूगल में देख कर बताता हूं ‘’ कहता  रहता था...

डॉ. मनीष कुमार मिश्रा की कहानी ‘जहरा’

              मैं ठीक से नहीं बता पाऊंगा कि उसका नाम जहरा था या जहरी । इतना याद है कि गाहे  बगाहे लोग दोनों ही नाम इस्तेमाल करते थे । इस बात से कभी जहरा को भी कोई फ़र्क पड़ा हो, ऐसा मुझे याद नहीं । उस गांव-जवार में जहरा की...

इंसान की कुत्ती ज़िन्दगी की कहानी डॉग स्टोरी

पल-प्रतिपल 85 में प्रकाशित योगेंद्र आहूजा की कहानी पर एक टिप्पणी सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव “वे लोग, जो भी हैं और जहां भी हैं, जान लें कि वे केवल जिस्म को खत्म कर सकते हैं, हमारे ख्याल नहीं, खाब नहीं और न उनसे लड़ते रहने का हमारा इरादा।” इन्हीं ख्याल, ख्वाब...

नीलिमा शर्मा की कहानी ‘लम्हों ने खता की’

रेखाचित्र : संदीप राशिनकर जिन्दगी के उपवन में हर तरीके के इंसान होते हैं। उन इंसानों में एक जात लड़की जात भी होती है । हर तरह के रंग,रूप, स्वभाव की लड़की । कच्ची उम्र में जड़ें तोड़ दी जाएँ तो पौधे की तरह पनपती नहीं है बोनसाई बन जाती...

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राजा सिंह की कहानी ‘पलायन’

रेखाचित्र : संदीप राशिनकर वे जा रहे हैं। वह परिसर से बाहर खड़ा, उन्हें दूर जाते देख रहा है। जब वे नज़रों से ओझल हो गए तो वह लौट आया। उनके कमरे में अपने को ढीला छोड़ते हुए वह राहत की साँस लेता है परन्तु उनकी आवाजें कर्कश, मृदु, तीखी,...

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शिवदयाल की कहानी ‘खटराग’

ईश्वरी बाबू मेरे पड़ोसी हैं। अक्सर शाम को हम साथ ही बैठते हैं और चाय पीते हुए देर तक बातें करते रहते हैं। इसमें रस बहुत मिलता है। और ईश्वरी बाब तो जरा-सी बात को ऐसा मोड़ और ऐसी गहराई दे देते हैं कि मन नहीं चाहता कि उनकी बात...

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अमरीक सिंह दीप की कहानी ‘प्रकृति’

वह इतनी सुन्दर है जितनी सुन्दर यह धरती। धरती पर खड़े पहाड़ । पहाड़ पर खड़े देवदार, चीड़ , चिनार , सागवान , बुरुंश के वृक्ष। पहाड़ों से गिरने वाले झरने। झरनों के समूह गान से बनी नदियां। नदियां , जो मैदानों में आकर बाग-बगीचों और खेतों को सींचतीं हैं...

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मधु कांकरिया की कहानी ‘जलकुम्भी’

प्रणीता की कहानी मैं लिखना नहीं चाहती थी क्योंकि उसे सम्पूर्णता में पकड़ पाना, अनंत उदासी के उसके घेरे को बेध पाना मेरे बस की बात नहीं थी. फिर भी उसकी कहानी मैं लिख रही हूँ तो महज इस कारण कि कौन जाने किन सहृदय पाठकों के हाथों में पड़कर यह...

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शंकर की कहानी ‘नायक’

ये प्रेम किशोर के लिए उद्भुत और अभूतपूर्व क्षण थे और स्टेट सर्विसेज प्रतियोगिता संयोजित करने वाले इस कार्यालय की इमारत से सफल परीक्षार्थियों की सूची देखकर निकलते हुए उनके पाँव जिस तरह उड़ रहे थे,  यह उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव था। उन्होंने पथरीली जमीन पर पाँव दबा-दबा कर...

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आनंद क्रांतिवर्धन का व्यंग्य ‘एक गोदी गांव की कथा’

एक समय की बात है, किसी देश में एक गांव था। जैसा कि सब जगह होता है, उस  गांव में भी एक पनघट  था। गांव की गोरियां रोज़ पनघट पर जातीं, हालांकि वे हिंदी फिल्में नहीं देखती थीं, फिर भी पानी भरने से पहले वे पंक्ति बनाकर ,एक दूसरे की...

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रमेश शर्मा की कहानी ‘जो फिर कभी नहीं लौटते’

रेलवे स्टेशन बहुत छोटा था। यदा-कदा पैसेंजर गाड़ियां ही शायद यहां रुका करती होंगी । रात के ठीक बारह बज रहे थे । ठंड का मौसम था । संयोग से उस दिन उस स्टेशन पर उतरने वाला वह एकमात्र यात्री था । आम तौर पर स्टेशन पर चहल-पहल रहती है...

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राजा सिंह की कहानी ‘बिना मतलब’

      टेम्पो से उतरकर मैं बाज़ार के पास खड़ा हो गया. यहीं उतरना पड़ता है. सामने कोकाकोला की इमारत है.  उसी के बगल के चौराहे से जवाहर नगर है.  वहीं पर रामकृष्ण नगर है, जहाँ पर उनका मकान है. रिक्शा लेना पड़ेगा. अपना स्कूटर ख़राब है, मैंकेनिक के पास है....

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हरियश राय की कहानी ‘अन्न जल’

यदि भयानक तूफान से ऐसा होता, तो भी हरि सिंह चौधरी संतोष कर लेते, यदि भूकंप में उनके खेतों की जमीन धंस जाती, तब भी वे उफ़ तक न करते और खुदा का खौफ मानकर सब्र कर लेते, यदि सूखे से जमीन दरक जाती तो भी अपने मन को किसी...

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रंजन ज़ैदी की कहानी ‘सैजादा’

     “हे साईं,  मान ले छोटी सरकार की बात। बुजुरग और पहुंचे हुए पीर पगारू हैं ये…..। इनके दरबार में फरियाद लैके आई हूं। नहीं सुनेगा तो मैं कडुवी निबौली की तरह डार से टूट कै इसी माटी में सड़-गल जाऊंगी।       रशीदन छोटी पीर के मज़ार के पायंती माथा...

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गजेंद्र रावत की कहानी ‘ग्रैंड पार्टी’

                    हमेशा की ही तरह सचिवालय बिल्डिंग के भीतर अफरा-तफरी मची हुई थी। तमाम लिफ्टें भरी! कैंटीन में जगह-जगह लोगों के जमघट!….. कहाँ से आते हैं इतने लोग ? क्यों आते हैं ? सैलरी रुक गई है क्या इनकी या ये...

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ममता शर्मा की कहानी ‘रिटायरमेंट’

सोमनाथ बाबू सुबह की सैर से लौटे और लिविंग रूम में  गद्देदार सोफ़े  पर आकर धंस गए।  पहले यह गद्देदार सोफ़ा   बैठकख़ाने  में  बड़े शौक़  से रखा गया था। फिर उसे घर के उस हिस्से में शिफ्ट कर दिया गया, जिसे लिविंग रूम कहा जा सकता है।   इसे रिटायरमेंट के...

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रचना त्यागी की कहानी ‘काला दरिया’

 शुरुआती औपचारिकताओं के बाद पत्र का मजमून कुछ यूँ था –  माननीय मंत्री जी,  वन्दे मातरम !          बहुत सोच-विचार के बाद आपको यह पत्र लिखने बैठा हूँ। विगत कई वर्षों की पीड़ा  जब वक़्त की चट्टान तले दबकर धूमिल होने की बजाय किसी बरगद की जड़ों की मानिंद फैलती चली गई, और मैं...

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सपना सिंह की कहानी ‘उसका चेहरा’

         मैं उससे पहली दफा एक दोस्त के घर मिला था और एक लम्बे अर्से बाद मेरा मन कविता लिखने को होने लगा था।           दोस्त ने ही उसका परिचय कराया था, इनसे मिलो, अनुसूया अपने शशांक की पत्नी। उसने अन्यमनस्कता से मुझे देखकर हाथ जोड़ दिये थे तभी उधर...

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अंजू शर्मा की कहानी ‘नेमप्लेट’

ये उन दिनों की बात है जब दिन कुछ अधिक लम्बे हो चले थे और रातें मानो सिकुड़-सी गईं थीं! उनके बड़े हिस्से पर अब दिन का अख्तियार था! ये उन्हीं गुनगुने दिनों में एक बड़े महानगर की एक अलसाई-सी शाम थी जो धीमे-धीमे चलकर अपने होने का अहसास कराने...