देवेश पथ सरिया की 3 कविताएं

देवेश पथ सरिया

 

साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन: वागर्थ, पाखी,  कथादेश, कथाक्रम, कादंबिनी, आजकल,  परिकथा, प्रगतिशील वसुधा, दोआबा, जनपथ, समावर्तन, आधारशिला, अक्षर पर्व, बया, बनास जन,  मंतव्य, कृति ओर,  शुक्रवार साहित्यिक वार्षिकी, ककसाड़, उम्मीद, परिंदे, कला समय, रेतपथ, पुष्पगंधा आदि पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित

 

समाचार पत्रों में प्रकाशन: राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, दि सन्डे पोस्ट

 

वेब प्रकाशन: सदानीरा, जानकीपुल, बिजूका, समकालीन जनमत, पोषम पा, शब्दांकन, जनसंदेश टाइम्स, हिन्दीनामा, दालान, अथाई

 

सम्प्रति:  ताइवान में खगोल शास्त्र में पोस्ट डाक्टरल शोधार्थी।  मूल रूप से राजस्थान के राजगढ़ (अलवर) से सम्बन्ध।

सुगबुगाहट

लड़की की दिनचर्या में

शामिल है,

दिन में एक बार

हंसकर

पागल कहना लड़के को

 

है सुगबुगाहट

नये प्यार की

 

शून्य की ओर

कभी उनका हो जाने को बाधित
कभी उनके छिन जाने से व्यथित

इस छोर से उस सिरे तक
रिश्ते का होना संपादित

पुरातन से मन को तन से
पृथक करते आ रहे बधिक

मृत्यु नहीं पर मृत्यु सरीखा
जीवंत पथ टोहता पथिक

आस-भरोस क्षीण
शून्य से निकटता होती अधिक

 

मंथन

समुद्रों के रहस्य सी

ग़ुम हुईं तुम

 

समुद्र खोज

तुम्हें ले आने के 

मंथन में

मेरे हिस्से आया विष

भटकना शापग्रस्त

नारद की तरह

अश्वत्थामा की तरह

रहना निरंतर अधमरा

 

अब मैं वैतरणी तरना चाहता हूँ

मैं अपने भीतर मथना चाहता हूँ

 

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