अनुपमा तिवाड़ी की कविताएं

ये कविताएं बहुत छोटी-छोटी हैं लेकिन इनका असर सीधे दिल पर होता है। पढ़कर महसूस कीजिए।

1.
मन, पता नहीं क्यों कभी-कभी,
मन, मन हुआ जाता है

2.
लम्हे रास्ते में रोक 
पूछते हैं
मेरा हाल 
मैं नज़रें चुरा कर निकल जाती हूँ—

3.
सब पत्थरों से मकान नहीं बनते
फिर भी हम कितनी ही बार
बेवजह पत्थर उठाते रहते हैं—

4.
विचारों के शिखर पर,
उग आती है
एक कविता—

5.
वह जो है
उसे वह बने रहने की कीमत कितने मोर्चों पर चुकानी पड़ी है
पर वो हर कीमत छोटी है, 
उसका वह होना बहुत बड़ा है—

6.
सूरज हर दिन जाते समय
मेरी आँखों में सुनहरी किरणों का
सुरमा लगा जाता है,
जिससे मेरी आँखों में
कुछ ख्वाब नए उग रहे हैं, 
कुछ जवान हो रहे हैं—

7.
कैसे कोई किसी के दिल में चुप से आ बैठता है
कि कोई कहता है,
तुम्हारे जाने से शहर वीरान हो गया है —-

8.
वो कहते हैं कि हम नहीं समझते 
पर वो जानते हैं कि, हम समझते हैं—

9.  
मुझे रोकना
बहुत ज़रूरी है, 
मेरे लिए नहीं 
तुम्हारे लिए !

10.
आँखों की कोर में बैठी, पानी की बूँद
नापती है दूरी, मेरे और बच्चों के बीच की !


अनुपमा तिवाड़ी 
ए – 108, रामनगरिया जे. डी. ए स्कीम 
एस. के. आई. टी कॉलेज के पास, जगतपुरा 
जयपुर 302017, फोन : 7742191212

1 Response

  1. Kamal says:

    बहुत सुंदर।

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