देवेश पथ सरिया की कविताएं

  1. पश्चाताप

मैंने प्रेम किया
जैसा साधक करते हैं

अंकित किया तुम्हें
हर पेड़ की हर पत्ती के हर रेशे में
देखा तुम्हारा अक़्स

बारिश की हर टपकती बूंद में
तुम पर्णहरित थीं
तुम जल का अणु

हश्र मेरा हुआ वैसा
जैसा हुआ करता है
बाज़ार में आंखें मूंद
धूनी रमाने वाले का

कवि होने का
यह पश्चाताप भी है
कि कुपात्र को उपमा देने में
मैंने व्यर्थ किया
प्रकृति के अवयवों को

कोई ठीहा नहीं
जहां छुपकर
दिल को
बचाया जा सके खरोचों से

कनाठे तक जलकर
बुझी हुई
माचिस की तीली
बेहतर विकल्प है।

  1. मूड स्विंग्स ज़ोन

वह ख़ुद को घोषित करती थी-
मूड स्विंग्स ज़ोन

मुझे वह कह देती थी
कभी बिल्कुल सच्चा
और मुझे ही बता देती थी कभी-कभी
कारण उसके त्वरित आवेश का

मैं जानता था
उसका इतिहास
अनावृत्त देखे थे मैंने
बचपन में पाए हुए उसके घाव
जिनसे रिसती थी वजहें
उसके मूड स्विंग्स की
दोलन करते उसके दिमाग़ को
साम्यावस्था में ही रखने की
कोशिश करती रहनी थी मुझे
साम्यावस्था से हर विचलन की
ज़िम्मेदारी भी होनी थी मेरी ही

इस बात पर हामी भरी उसने
कि बोरियत भरा होगा
उसके लिए सदा सामान्य रहना

मैंने पूछा कि क्या वह मुझे मानती है
बोरा भर हंसी और चुटकी भर उन्माद

उसने कहा-
“शायद”

शायद कहकर
उसने खुली छोड़ दी एक खिड़की
जिससे मैं आ सकता था
अपने सच और बेबाकी के साथ

हवा-रोशनी भी
यूं ही किसी खिड़की से आते थे
सहलाते थे उसका रोम-रोम
मिटाते थे बुरे छुअन की याद
और वह पुरसुकून नींद सो पाती थी

  1. मसखरा

संदेह है मुझे
कि मेरे चश्मे का नंबर बढ़ाने में
गुनाहगार है चिलचिलाती धूप भी

नए नंबर वाले
एक अतिरिक्त चश्मे को
धूप का बनवाया है मैंने

जब तक वह नहीं आता बनकर
मैं पहनकर निकला हूं
दो चश्मे एक साथ
धूप के बिना नंबर के चश्मे के ऊपर चढ़ा कर
नज़र का चश्मा

कोई हंसेगा क्या
इस पर?

हंसे फिर…
कवि होने के इतर
मेरी कामना थी सदा से
छू सकने की
क्रियात्मकता का दूसरा आयाम भी।

4 Responses

  1. M P Haridev says:

    पहली यह लिख दूँ की मैंने परिश्रम, अपनत्व और लग्न से इस बॉक्स में टिप्पणी करने के पश्चात अपना नाम और ईमेल का पता लिखा था । Add your comments पर उँगली भी दबायी लेकिन वह टिप्पणी इस site पर पहुँची नहीं होगी । “हमको किसके ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही” बक़ौल ग़ुलाम अली । आपके कवि मन ने निस्संदेह साधक की तरह प्रेम किया । साध्य नहीं मिलता । “कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता” अंकित करना और पेड़ के पत्ते के हर रेशे में प्रेमिका का अक्स देखने वाले साधक देवेश(सर्वव्यापक और सर्वशक्तिमान के)पथ पर चलने वाले ब्रह्म ऋषि आपकी साधना हर पल पल्लवित हो रही है । प्रयोगशाला में परिश्रम करने के बाद मन कविता की जालियाँ बुनता होगा । जैसे माँ स्वेटर की जालियाँ बुनती है । किरण prism से गुज़रने के बाद सात रंगों में निकलकर आती है । ऐसे ही बारिश के बाद आकाश में टँगी रह गयी बूँदों से बन चुके इंद्रधनुष 🌈 की तरह की छवि प्रेयसी में देखी । प्रेम के पाले में पड़ने वाला धूनी ही रमाता है । हमेशा उपमाओं के अवयव व्यर्थ जाते हैं । यदि दो प्रेमी पत्नी-पति बन जायें और प्रेम तिरोहित न हो तब समझ लेना चाहिए कि स्वर्ग धरती पर है; वह
    अपने घर में हो सकता है । दोनों के अहंकार का विलीनीकरण हो गया है । बहुत से लोगों को कुपात्र मिले और शोषण भी हुआ । “सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या हुआ”। ऐसा नहीं है कि प्रेम धरती से उठ गया है । “कोई ठीहा नहीं
    जहाँ छुपकर दिल को बचाया जा सके खरोंचो से “ ये पंक्तियाँ दुख व्यक्त करने को इंतिहा हैं । देशज शब्द लिखकर इन पंक्तियों का मूल्य बढ़ गया । तीली के जलने की बात से मुझे Homelite brand की माचिस की डिब्बी की याद आ गयी । उसकी छोटी और बड़ी डिब्बी की तीलियाँ बड़ी, मोटी और ठोस होती थीं । वह brand किसी और कंपनी ने ख़रीदकर उसका सत्यानाश कर दिया है । वे उँगली को इसलिये नहीं जलने देती थी कि तब तक अपना मक़सद पूरा हो जाता था ।
    नयी पीढ़ी पढ़-लिख कर आगे पहुँच गयी है लेकिन उनका Mood swinging risen has become new phenomenon. कभी सच्चा बताना और कभी इन्कार कर देना पेशेवर हो गया है । इस पहरे के भाव समझने के लिये “ कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की बड़ी ख़ूबसूरत मगर साँवली सी “ गीत सुनने से कुछ-कुछ जगह मेल खाता है । सुबह साढ़े दस बजे जब मैं टिप्पणी कर रहा था और इस site पर पोस्ट नहीं हुई (मेरी नासमझी के कारण हुआ होगा) तब दो सादी रोटियाँ (हमेशा बिना सब्ज़ी के साथ)खा रहा था तब घी से सन गयी उँगलियों को बार-बार पोंछ रहा था । यह सोचकर कि टिप्पणी ग़ायब न हो जाये । One of my friends son was to come to me to carry me to civil hospital. To combat Corona Virus pandemic I had to get first shot of vaccine. By chance he could not come. And I am adding my comments.
    दिमाग़ को साम्यावस्था में लाने की ज़िम्मेदारी खुद की होती है । मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिये पतंजलि के अष्टांग योग विश्व को अनुपम देन हैं । कुछ वर्षों से वैश्विक स्तर पर योग दिवस मनाया जाना शुरू हुआ है । नासमझी से हम yoga को योगा कहते हैं । योगा शब्द का अस्तित्व ही नहीं है । हमारी वर्णमाला के प्रत्येक व्यंजन में अदृश्य हलंत है । और उसमें ह्रस्व जोड़ने से अक्षर का निर्माण होता है ।जैस क । यदि हम कृष्ण को अंग्रेज़ी में लिखें तब Krishna लिखना पड़ेगा और उच्चारण कृष्ण ही होगा । a ह्रस्व की जगह ले रहा है । बोरियत भरा होना भी बचने का रास्ता है । और यह छुरे का काम करता है ।

  2. M P Haridev says:

    प्रेम साधना पड़ता है और यह भी आवश्यक नहीं कि साध्य सध जाये । प्रेम हर पत्ते में रेशे की तरह पिरोया । यह अनूठी कथा है कि ‘One falls in love’. पता नहीं कि डूबने वाले को कुछ हासिल हो या न हो । प्रेमी और प्रेमिका विवाह करने के बाद यदि प्रेम तिरोहित नहीं होता तब यह मान लेना चाहिए कि दोनों ने उत्सर्ग किया है । Spouse has given maximum love to one another. आपकी कविता में कटु अनुभवों की चर्चा की है । और यह अक्सर होता है । There is never fifty fifty from both of them. “ कोई ठीहा नहीं जहाँ छुपकर दिल को बचाया जा सके खरोंचों से” पीड़ा की इंतिहा है ।
    Moods swing also is not a new zone. हवा का झोंका आता-जाता रहता है । हमारे यहाँ कहावत है “पल विच मासा पल विच ” । दोनों तोल के पैमाने हैं । वजहों का घाव की तरह रिसना सच्चाई है । एक तपस्वी की तरह आपके भीतर बैठे कवि ने सुख और दुख में सम भाव बनाने का प्रयास किया । इस कविता का बाक़ी का हिस्सा उत्कृष्ट है ।
    एक दृष्टि से टिप्पणी करने की विधा अच्छी है । पेज को ऊपर-नीचे करके कविता को देखकर समूची कविता को समझा जा सकता है । कम से कम लिंक ग़ायब नहीं होता । ग़ायब होने से कविता की विषय-वस्तु को खोलकर पुनः पढ़ता है । इसके बावजूद भी मेरे जैसे कम जानकार व्यक्ति को इस प्रकिया से जूझना पड़ता है । आप जानते हैं कि ‘बहुत अच्छी; बहुत उमदा” “श्रेष्ठ कविता” कहकर काम नहीं चलाता । In my perspective it irritates.
    आपकी ऐनक(हमने प्राथमिक शाला में ऐ के लिये ऐनक पढ़ा था इसलिये चश्मा नहीं लिखा और मैं ऐनक ही बोलता हूँ)का नंबर Post doctoral research and continuing efforts have impact. We are pleased that you are marvellous in numerous genres.
    कविता का शीर्षक मसखरा पढ़कर हँस रहा हूँ और ख़ुश भी हो रहा हूँ । एक रुकावट आ रही है कि हर रोज़ की तरह बिना सब्ज़ी के दो सादी रोटियाँ खा रहा हूँ । उँगलियों पर घी लग रहा है । “मैं नहीं माखन खायो” की तरह ग्वाल बाल सब बैर पड़े हैं ज़बरन मुख लिपटायो’ । बार-बार उँगली से घी पोंछते हुए लिख रहा हूँ । यह भी डर है कि कहीं मेहनत ख़राब न हो जाये । Yesterday one of my friends son may come to me to get my first shot to combat Corona Virus pandemic. He told me to not go to hospital with empty stomach. मेरे पास दो ऐनकें हैं । दोनों में Essilor’s company of Japan’s photo chromatic lens लगे हुए हैं । अगले पहरे में ऐनक का विकल्प अच्छा है । Again it reflects that your way of thinking is on the top of position. मैं बचपन में उन उन उन्नत सोच वाले लोगों पर हँसता था जिनके पेट मोटे होने के कारण बेल्ट की बजाय एक ख़ास क़िस्म की बेल्ट लगाते थे जो कंधों पर से होकर सीने के सामने से नीचे पैंट के दोनों तरफ़ सीधे एक ख़ास क़िस्म की स्टील की बनी हुई पकड़ से पकड़ती और पीछे से क्रॉस होती हुई । अब उसका नाम याद आ गया गैलस । I have tried to search the word in Oxford dictionary, but I have loosened my patience in a fear of not eloping of my comments. आप क्रियात्मकता के दूसरे आयाम को समझा दें । गैलस शब्द को ढूँढने का प्रयास करूँगा । और आप भी ।

  3. सोनू यशराज says:

    मानीखेज कविताएं

  4. Vinod Vithall says:

    तीनों कविताएँ अच्छी हैं ।

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