धर्मपाल महेंद्र जैन की कविताएं

  1. ब्लैक होल

भौतिकी अध्ययनशाला में पढ़ते हुए
सुनसान रातों में ढूँढते थे चमकते सुदूर तारे
जीवन की खोज में जाते
अंतरिक्ष यानों पर रखते थे निगाह
और समझना चाहते थे
ब्लैक होल का चुंबकीय आकर्षण।
मोटी किताबों में आकाश ही आकाश था
आदमी नहीं था कहीं।

फिर ऐसा कुछ हुआ
जैसा कहानियों में होता है
हम राजकुमार दूरबीन छोड़
गाँव की कच्ची सड़कें रूबरू देखने लगे
लोग ही लोग थे यहाँ
धरती के गुरुत्व में छटपटाते।
प्लास्टिक की थैली में
साँस लेती दिखती थी
कुछ पन्नों की मरियल किताब।
गौर से पढ़ा था उस किताब को पहली बार
‘भू-अधिकार एवं ऋण-पुस्तिका’
भू-अभिलेख का पाठ एक पंक्ति का था
और ऋण-पुस्तिका का अध्याय कई पन्नों में
साफ दिख रहा था ब्लैक होल
और उसमें डूबी कई पीढ़ियाँ।

  • अशेष

पीपीई के भेष में यह जानना मुश्किल है
कि डॉक्टर के चेहरे पर
संवेदना की कर्क रेखा
कहाँ से गुजरती है।
मैं उसके लड़खड़ाते पाँवों में
भूकंप महसूस करता हूँ।
वह थका-थका कहीं बैठना चाहता है
शायद आँखें बंद कर
जो पथराई-सी लगती हैं
जमीन पर पड़े दो बेमेल कंचों की तरह।
नर्स उदास है मशीनें हटाते हुए
वह सिर्फ संकेत समझती है
मॉनीटर पर ऊपर-नीचे होती धारियों के
सपाट हो जाने का
और नीले अंकों के लाल हो जाने का।
फड़फड़ाते फेफड़ों को नहीं चाहिए
ऑक्सीजन अब और।
उसे नहीं मालूम
इस कमरे के बाहर दुनिया कैसी है
सूरज कैसे-कब आता है
बस कोई और नर्स आ जाये यहाँ
किसी और उखड़ती साँस के साथ
इन मशीनों से नई उम्मीद लगाए।
वह जो कभी दोस्त था अज़ीज
सुरक्षित आवरण में बंद है
किसे देखकर अलविदा कहा जाए
उँगलियों में काँपते कागज़ पर
आँसू टपकाना ठीक नहीं है
यही तो है
उसके अब नहीं होने का प्रमाण पत्र।

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  • प्रेस क्लब

प्रेस क्लब का मुख्य द्वार
यूँ तो लोहे की सलाखों का है
जो दिखने में मोटी और
भीतर से खोखली हैं।
अंदर की इमारत पुरानी है, भले
इन दिनों पुरानी चीज़ों को
जर्जर कहना अपराध है
बेशक उन्हें जर्जर बनाना
अपराध नहीं है।
बड़े से हॉल के शीर्ष पर कैंटीन है
देसी-विदेशी बोतलें सजी हैं
कुर्सियों पर गर्दन झुकाए लोग
ख़बरों पर बर्फ़ डाल कर पी रहे हैं
ख़बरों के छल्ले उड़ाने पर पाबंदी है
हाँ ख़बरों के कश
फेफड़ों में दबा लेना जायज़ है।
हर टेबल पर ख़बरें हैं
ख़बरों में गोलमटोल आँकड़े हैं
पोल-पट्टियों के सुराख हैं
लीपापोती के पैबंद हैं।
काले कमांडो से घिरा जादूगर आता है
सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को चादर ओढ़ा देता है
उसकी छड़ी से विज्ञापन झड़ते हैं
अर्थव्यवस्था ऊपर उठने लगती है
ख़बरों के काग़ज टुकड़े-टुकड़े हो
फूलों में बदल जाते हैं।
वहाँ बैठे कुछ बदज़बान लोग
बड़बड़ा रहे हैं
उम्र भर लिखने के बावजूदॉ
वे ठीक से तारीफ़ें लिखना नहीं सीख पाये।
लोग अपनी प्लेटों में नाश्ता भर-भर बैठे हैं
राजा मिदास का इंतजार है
कहते हैं वह आएगा और प्लेटों को छू देगा
प्लेटें चमकदार पीली आभा से भर जाएँगी
बस उस वक़्त के इंतजार में प्रेस क्लब खुला है।
प्रेस क्लब के छोटे-बड़े हॉल के दरवाज़े
भीतर से बंद हैं
हर कहीं विचार-विमर्श है
ख़बरें नक्शों की तरह लाइनों में खींची गई हैं
हर मोड़ पर संकेत हैं
कुछ लोगों ने तहख़ानों की सीढ़ियाँ देख ली हैं
अंधेरे में आसान होता है वहाँ घुसना।
प्रेस क्लब के बाहर
आदमी-औरत का एक जोड़ा
असली ख़बर नाम का अख़बार बेच रहा है
उनसे सड़ती हुई ख़बरों की गंध आती है
नाक-भौं सिकोड़ते हुए लोग
मुफ़्त में सुगंधित ताज़ा ख़बरें बटोरने
अंदर घुस रहे हैं।

  • किशोर

कंक्रीट की साइड वॉक पर झूमते अश्वेत किशोर
उनका गाना, थिरकना, बहकना अपराध-सा लगता है
चलते राहगीर डरते हैं उनसे
दो हाथ दूरी बना कर निकल जाते हैं चुपचाप
भावहीन चेहरा और भयाक्रांत दिल लिए।
अश्वेत किशोर शब्दों को चबा जाते हैं
बोलने के पहले
शब्द की देह देखकर
अर्थ का अनुमान हर बार सही नहीं होता
यौनिक गालियाँ प्रत्यय न बनीं तो
उनका उपसर्ग होना तय है वाक्य में  
उनकी भाषा बुलेट-सी भेद जाती हैं।
जिस किशोर को मैं जानता हूँ सालों से
उसकी माँ है, बाप सौतेला है
बड़ी बहन है पर उस जैसी नहीं लगती
घर है जहाँ लोग बिखरे पड़े हैंॉ
और गहराती शामों के गाढ़े धुएँ में
अज़ीब-सा नशा होता है।
कुछ पाने का सपना नहीं है और
न कुछ खोने का
बस कुछ दोस्त हैं उस जैसे बेपरवाह
उनके लिए कल का कोई अर्थ तो हो ।

धर्मपाल महेंद्र जैन

प्रकाशित पुस्तकें: व्यंग्य संकलन – “इमोजी की मौज में”, “दिमाग़ वालो सावधान” और “सर क्यों दाँत फाड़ रहा है?” एवं कविता संकलन – “कुछ सम कुछ विषम” और “इस समय तक” प्रकाशित। बीस साझा संकलनों में।

चाणक्य वार्ता एवं सेतु में स्तंभ लेखन। नवनीत, कादम्बिनी, आजकल, लहक, अक्षरा, कथा क्रम, पहलव्यंग्य यात्रा, अट्टहास, पक्षधर, साक्षात्कार, यथावत, समावर्तन, कला समयजनसंदेश, ट्रिब्यून, दुनिया इन दिनों, सृजन सरोकार, साहित्य अमृत, विश्व गाथा, विभोम स्वर आदि में रचनाएँ प्रकाशित।

ईमेल : dharmtoronto@gmail.com                            फ़ोन : + 416 225 2415

सम्पर्क : 1512-17 एनडेल ड्राइव, टोरंटो M2N2W7, कनाडा

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