प्रशान्त गौतम की कविताएं

1.

उसने कहा,
मुझे यथार्थ पर भरोसा है
जो दिखाई देता है
धरातल पर
और तुम कवि हो!
तुम्हें होगा कल्पनाओं पर।

मैंने कहा
मुझे कल्पना और\
यथार्थ दोनों पर भरोसा है,
क्योंकि
कल्पना की अंशतः
परिणति ही यथार्थ है।

अगर मेरी सभी कल्पनाएं
यथार्थ में बदल गयी,
तो एक दिन
तुम हमेशा के लिए
मेरी हो जाओगी,
फिर ये होगा यथार्थ।

2.

ये इंसान की फितरत है!
खोये रहना;
भविष्य की कल्पनाओं में,
या फिर यादों के इतिहास के
खंडहर की खुदाई करना,
परत दर परत।
शायद ये एक जरिया हो;
खुद को, खुश रखने का
या यथार्थ से मुंह मोड़ने का।

लेकिन मैंने बुद्ध से सीखा है,
वर्तमान में जीना।
तुम्हारे साथ!
सब खण्डहर हो जायेगा;
एक दिन।
मैं नहीं चाहता, तमको ढूँढना
यादों के खण्डहर में ।
तभी मैं वर्तमान को इतिहास
बनाना चाहता हूँ;
तुम्हारे साथ!

प्रशान्त गौतम
हरदोई (उत्तर प्रदेश)
वर्तमान निवास – लखनऊ

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