संजीव ठाकुर की कविता ‘प्रेमिका की याद’

संजीव ठाकुर

प्रेमिका की याद

 1

प्रेमिका की याद

मजबूत खूँटी

टाँगकर खुद को

हुआ जा सकता है

निश्चिंत ।

 

2

प्रेमिका की याद

शहद में डूबा तीर

बार–बार खाने का मन करे ।

 

3

प्रेमिका की याद

बरसाती नदी नहीं होती

प्रेमिका की याद

बूँदा–बाँदी भी नहीं

प्रेमिका की याद होती है

मूसलाधार वर्षा,

अथाह जल समेटे

प्रशांत महासागर !

 

4

जब पड़ रहा हो चिल्ला जाड़ा

प्रेमिका की याद

आग है

मंद–मंद सुलगती

उगल रहा हो सूरज गर्मी

प्रेमिका की याद

ठंडे पीपल की छाँह !

 

5

प्रेमिका की याद

नदी की धार

डूब जाने का मन करे !

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