Tagged: HINDI

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हरियश राय की कहानी ‘ऐसा हो तो…’

हरियश राय उत्‍तर प्रदेश के फतेहगढ़ में प्रारम्भिक शिक्षा, 1971 के बाद की शिक्षा दिल्ली से। दो उपन्यासों‘नागफनी के जंगल में’और‘मुट्ठी में बादल’के अलावा  छ:  कहानी संकलन‘बर्फ होती नदी’, ‘उधर भी सहरा’,‘अंतिम पड़ाव’, ‘वजूद के लिए’,‘सुबह- सवेरे’व‘ किस मुकाम तक ‘’प्रकाशित. इसके साथ ही सामयिक विषयों से संबंधित पांच अन्‍य...

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संजय शांडिल्य की प्रेम कविताएँ

संजय शांडिल्य जन्म : 15 अगस्त, 1970 |स्थान : जढ़ुआ बाजार, हाजीपुर |                     शिक्षा : स्नातकोत्तर (प्राणीशास्त्र) | वृत्ति : अध्यापन | रंगकर्म से गहरा जुड़ाव | बचपन और किशोरावस्था में कई नाटकों में अभिनय | प्रकाशन : कविताएँ हिंदी की...

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कैलाश सत्यार्थी की कविता ‘तब हम होली खेलेंगे’

कैलाश सत्यार्थी कवि नोबेल शांति पुरस्‍कार से सम्‍मानित मशहूर बाल अधिकार कार्यकर्ता हैं हर साल होली पर उगते थे इंद्रधनुष दिल खोल कर लुटाते थे रंग मैं उन्हीं रंगों से सराबोर होकर तरबतर कर डालता था तुम्हें भी तब हम एक हो जाते थे अपनी बाहरी और भीतरी पहचानें भूल...

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निर्मल गुप्त की कविता ‘सदाकत का शिनाख्ती कार्ड’

निर्मल गुप्त सदाकत देखते ही देखते चौरसी* से कुरेद लेता सख्त से सख्त काठ पर खूबसूरत बेल बूटे , नाचता हुआ मोर छायादार पेड़ ,फुदकती गिलहरी , उड़ती तितली खिला हुआ फूल , खपरेल वाला सुंदर मकान मटकी लिए जाती पतली कमर वाली षोडशी. उसे मिला हुआ था सरकार बहादुर से माकूल...

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विवेक आसरी की 6 कविताएं

विवेक आसरी विवेक आसरी कर्म से पत्रकार. मन से यायावर. और वचन से लेखक. वह 15 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं. भारत, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के मीडिया संस्थानों में ऑनलाइन, रेडियो और टीवी पत्रकारिता कर चुके हैं. फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के एसबीएस रेडियो की हिंदी सेवा के लिए बतौर प्रोड्यूसर काम कर...

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स्वाति शर्मा की 4 कविताएं

स्वाति शर्मा बातें कुछ ऐसी बातें होती हैं कुछ यूं ही यादें होती हैं कुछ डूब उतर के जाती हैं कुछ देख़ती ही रह जाती हैं कुछ ख़ुद ही खुद में खोती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं सांसों में चलती रहती हैं कुछ चुप हैं तो कुछ कहती हैं कुछ दम ही में अटक गईं और ख़्याल की स्याही टपक गई जो जी-जी कर जोती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं अनकही तो ख़ालिस ख़ुशबू है कह दी तो बिखरा जादू है कुछ आस में पलती रहती हैं कुछ आह में जलती रहती हैं कुछ बीज नए भी बोती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं बातें कुछ कह दी जाती हैं काफ़ी पर रह ही जाती हैं जब रातों से डर लगता है और रातें साथी होती हैं दिन भर तब ख़ुद से होती हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं अधूरे चाँद सा आज दिल है कुछ अधूरे नग़मे सुनने का अधूरी बातें अधूरे सपने अधूरी यादें बुनने का कुछ कहो जो...

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साहित्य को नई आधार शक्ति देती है ‘दोआबा’

‘दोआबा’ (पत्रिका) / संपादक : जाबिर हुसेन / प्रकाशक : दोआबा प्रकाशन / 247 एम आई जी, लोहियानगर, पटना-800020 / मूल्य : 75 रुपए / संपादकीय संपर्क : doabapatna@gmail.com, 09431602575 शहंशाह  आलम ख्यात साहित्यकार जाबिर हुसेन के संपादन में निकल रही पत्रिका ‘दोआबा’ का इकतीसवाँ अंक साहित्य के समकालीन प्रसंग...

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सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की कहानी ‘प्रीमियम’

सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव शिक्षा : बीएससी (फिजिक्स ऑनर्स), एम ए (हिन्दी), एम ए (पत्रकारिता, गोल्ड मेडलिस्ट) सारी पढ़ाई कलकत्ता  विश्वविद्यालय से पेशा : 3 दशकों से पत्रकारिता। कोलकाता के दैनिक अखबार ‘सन्मार्ग’ से 1990 में नौकरी की शुरुआत। दस सालों तक सन्मार्ग में रहने के बाद टेलीविजन पत्रकारिता में। 2001...

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पल्लवी मुखर्जी की 5 कविताएं

पल्लवी मुखर्जी शब्द मरते नहीं मेंरे भीतर की आग का थोड़ा सा हिस्सा लेकर तुमने सुलगाई जीवन की लौ बाकि बचे हुए आग की आँच को हवा देती हूँ मैं उसकी लौ पर उबलते हैं शब्द शब्दों की भाषा को पढ़ते हो तुम शब्द मिट्टी में मिलने से पहले एक...

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कथा-कहानी की 13वीं गोष्ठी

कथा- कहानी की ओर से दिनांक 31 अगस्त 2019 को गांधी शांति प्रतिष्ठान में कहानी पाठ का आयोजन किया गया। यह गोष्ठी इस मायन में महत्वपूर्ण थी कि यह दूसरे साल की पहली गोष्ठी थी। पिछले साल कथा कहानी ने बारह गोष्ठियों का आयोजन किया जिसमें पच्‍चीस कथाकारों ने अपनी...

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कवि से पहले नेक इंसान बनना जरूरी: विजेंद्र

वरिष्ठ कवि विजेंद्र से सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की ख़ास बातचीत लिटरेचर प्वाइंट संवाद वरिष्ठ कवि विजेंद्र 84 साल की उम्र में भी पूरी सक्रिय हैं. कविता लिखते हैं, पेंटिंग बनाते हैं। फेसबुक पर भी सक्रिय हैं। हिन्दी कविता में उनका स्थान क्या है, यह नए सिरे से बताने की जरूरत...

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2020 के मानबहादुर सिंह लहक सम्मान की घोषणा

कोलकाता से प्रकाशित चर्चित पत्रिका ‘लहक’ 2020 के लिए मानबहादुर सिंह लहक सम्मान की घोषणा कर दी है। अगले वर्ष ये सम्मान मधुरेश और कांति कुमार जैन को प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान है, पुरस्कार नहीं। न ही इसमे किसी तरह की रचनाएँ आमन्त्रित की जाती हैं, न चयन की...

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शशांक पांडेय की 7 कविताएं

शशांक पांडेय सुभाष लाँज, छित्तुपुर, बी.एच.यू, वाराणसी(221005) ● मो.नं-09554505947 ● ई.मेल-shashankbhu7@gmail.com 1. खिड़कियाँ मैंने बचपन में ऐसे बहुत से घर बनाएं और फिर गिरा दिए जिनमें खिड़कियाँ नहीं थीं दरवाजें नहीं थे बाकी सभी घरों की तरह उस घर में  मैंने सबकुछ लगाए थे लेकिन फिर भी  दुनिया को साफ-साफ...

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चन्द्र की कविता ‘दु:ख’

बहुत दुख से जब ग्रस्त हो जाता हूं मैं तब भीतर भीतर पसीज पसीज के रो रो जाता हूं तब अपनी पलकों पर पसरी हुई कई कई दिनों की मैल को  धो धो जाता हूं और  अंततः किसी घनेरी रात की लम्बी नींद में चुपचाप  सो सो जाता हूं और...

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कृष्ण सुकुमार की 5 कविताएं

कृष्ण सुकुमार ए०  एच०  ई०  सी० आई. आई. टी. रूड़की रूड़की-247667 (उत्तराखण्ड) मोबाइल नं० 9917888819 kktyagi.1954@gmail.com एक प्रेमिकाएं उड़ रही थीं आकाश में ! प्रेमी धरती पर चुग रहे थे बिखरा हुआ अपना वर्तमान ! खिलती हुई हवाओं के फूलों ने सपनों में बिखेर रखी थी ख़ुशबू ! जब कि...

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शिवदयाल के उपन्यास ‘एक और दुनिया होती’ का एक अंश

                       रात को ओढ़ने के लिए मेरे पास तो कुछ था नहीं। रात एक झोपड़ी के ओसारे में गुजारनी थी। पुआल का बिस्तर लगा और मुझे सहारा मिला बम्बइया से। उनके पास कंबल था। बीड़ी सुलगाने के पहले उन्होंने कंबल खोला और मुझ पर डाल दिया। कुछ इधर-उधर की बात...

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अनवर सुहैल की 4 कविताएं

अनवर सुहैल ये कविताएं अनवर सुहैल के कविता संग्रह डरे हुए शब्द से ली गई हैैं। संग्रह किंंडल पर उपलब्ध है। डाउनलोड करने के लिए नीचे क्लिक करें कितना ज़हर है भरा हुआ समय का ये खंड भोगना ज़रूरी था वरना हम जान नहीं पाते कि हमारे दिलों में एक-दूजे...

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रंजना जायसवाल की कहानी ‘कैसे लिखूं उजली कहानी’

रंजना जायसवाल जन्म  : ०३ अगस्त को पूर्वी उत्तर-प्रदेश के पड़रौना जिले में | शिक्षा –गोरखपुर विश्वविद्यालय से “’प्रेमचन्द का साहित्य और नारी-जागरण”’ विषय पर पी-एच.डी | प्रकाशन –आलोचना ,हंस ,वाक् ,नया ज्ञानोदय,समकालीन भारतीय साहित्य,वसुधा,वागर्थ,संवेद सहित राष्ट्रीय-स्तर की सभी पत्रिकाओं तथा जनसत्ता ,राष्ट्रीय सहारा,दैनिक जागरण,हिंदुस्तान इत्यादि पत्रों के राष्ट्रीय,साहित्यिक परिशिष्ठों...

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संजीव ठाकुर की बाल-कथा ‘डरपोक’

संजीव ठाकुर सीतेश पूरे हॉस्टल में बदनाम था। उसकी बदनामी इस बात में थी कि वह न तो कभी ठीक से नहाता था, न ही ढंग से कपड़े पहनता था और न ही बिस्तर ठीक करता था। उसकी किताबें-कापियाँ वगैरह भी जैसे-तैसे ही रहती थीं। वह कभी भी समय पर...

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अर्पण कुमार की 5 कविताएं

अर्पण कुमार दो काव्य संग्रह ‘नदी के पार नदी’ (2002), ‘मैं सड़क हूँ’ (2011) एवं एक उपन्यास ‘पच्चीस वर्ग गज़’ (2017) प्रकाशित एवं चर्चित। कविताएँ एवं कहानियाँ, आकाशावाणी के दिल्ली, जयपुर एवं बिलासपुर केंद्र से प्रसारित। दूरदर्शन के ‘जयपुर’ एवं ‘जगदलपुर’ केंद्रों से कविताओं का प्रसारण एवं कुछ परिचर्चाओं में...