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जो पढ़ रहे हैं, वही कहानियों को बचा रहे हैं : शंकर

कहानी के विभिन्न पहलुओं पर वरिष्ठ कथाकार और परिकथा के संपादक शंकर से ख़ास बातचीत। बातचीत की है वरिष्ठ कथाकार हरियश राय और सत्येंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने सत्येंद्र : शंकर जी, आप वरिष्ठ कथाकार भी हैं और संपादक भी। तो शुरुआत इसी सवाल से करते हैं कि आखिर कहानी है...

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‘कविता लिखना आसान काम नहीं’

1.कविता के प्रति आपका झुकाव कैसे उत्पन्न हुआ ? शहंशाह आलम : मेरा पूरा समय अभाव में गुज़रा है। होश संभाला तो देखा पिता हम पाँच भाई और तीन बहनों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिता बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कंपनी के मुंगेर प्रतिष्ठान में मामूली ड्राइवर थे। जो...