Tagged: satire

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परसाई की रचनाओं का रंगमंचीय दृष्टिकोण

  अखतर अली मूलतः नाटककार, समीक्षा एवं लघु कथाआें का निरंतर लेखन, आमानाका, कुकुर बेड़ा रायपुर (छ. ग.) माे. न. 9826126781 हरिशंकर परसाई को पढ़ना स्वयं को अपडेट करना है | जब हम परसाई जी को पढ़ रहे होते हैं दरअसल उस क्षण हम अपने समय को पढ़ रहे होते...

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हमारी भी छापो! हम भी लेखक-वेखक हैं!

व्यंग्य आलोक प्रकाश एक बहुत ही गुणी साहित्यकार हैं. मुझ से उम्र में बड़े हैं. उनका लिहाज करता हूँ मैं. सर कहकर संबोधित करता हूँ उनको. फ़ेसबुक पर उन्होंने एक ग्रुप बनाया हुआ है. इसमें हम साहित्यकारों की कृतियाँ प्रकाशित होती हैं. ग्रुप तो दूसरे भी हैं लेकिन उनका  स्टैंडर्ड मेरे स्टैंडर्ड...

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राकेश कायस्थ का व्यंग्य ‘मत रोइए मी लॉर्ड…’

राकेश कायस्थ मी लार्ड का सादर अभिवादन। आप इस देश के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश हैं और मैं इस देश का एक अदना सा नागरिक। मेरे बाप-दादा कहा करते थे—- समझदार वही है जो कोर्ट-कचहरी के चक्कर से दूर रहे। कानून के रखवाले बहुत रूलाते हैं। बचपन में जो...