दुनिया की भयावहता से लड़ने की ऊर्जा देने वाली किताब

पुस्तक समीक्षा

सीमा संगसार

तोत्तो चान एक अकेली ऐसी पुस्तक थी , जिसे मेरे कई शुभचिंतकों ने पढ़ने की सलाह दी। अमेजन पर उपलब्ध नहीं होने की वजह से मैं इसे पढ़ नहीं पा रही थी। एक आदर्श शिक्षक और एक माँ के लिए यह किताब पढ़ना उतना ही जरूरी है जितना कि उनकी रसोई में नमक का होना …

मूल जापानी भाषा में लिखी गई इस पुस्तक की लाखों प्रतियां देश – दुनिया के कई भाषाओं में अनूदित होकर खरीदी और पढ़ी जा रही हैं। हिन्दी भाषा में नेशनल बुक ट्रस्ट ने इसे प्रकाशित किया है।

यह किताब आपको झकझोर कर रख देती है। अगर आप बच्चों की मनोदशा को अच्छी तरह समझना चाहते हैं या फिर आपको अपना बचपना पसंद है तो यह पुस्तक आपके लिए ही है। 

तोत्तो चान जिस उम्र में इतनी संवेदनशील और समझदार है वह अपने उम्र से काफी बङ़ी दिखती है , वहीं उसकी बालसुलभ हरकतें इतनी मजेदार है कि आप पेट पकङ़ कर हँसने पर मजबूर हो जाएँ। 

तोत्तो चान इंसानियत की पहली शर्त है. उसे अपने घर के जर्मन शेफर्ड रॉकी कुत्ते से ही नहीं गली के तमाम आवारा कुत्तों से ही उतना ही प्यार है ।रॉकी के साथ उसकी दोस्ती इतनी निस्वार्थ और मार्मिक थी यह बात रॉकी के द्वारा उसके कान काट लिए जाने की घटना से चलती है। जब वह अपने माता – पिता को इसलिए अपना कटा कान नहीं दिखा रही थी कि वे रॉकी को डांटेंगे और मारेंगे ….

इस पुस्तक को पढ़ने के बाद इस भयावह दुनिया से लङ़ने की एक सकारात्मकता का प्रवाह होता है। अब वह वक्त आ गया है कि हम अपने दुश्मनों से भी प्रेम करना सीखें।

तोत्तो चान का ताकाहाशी और यासुकी चान जैसे दिव्यांग बच्चों के प्रति असीम प्रेम उसकी अगाध दयालुता का परिचय देती है और यह सब वह पहली कक्षा की छात्रा होकर कर रही है ।

तोत्तो चान का पहले स्कूल से निकाले जाने की घटना ही दरअसल आज के शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई है ।बिना बच्चों की भावनाओं को समझे कि आखिर उसकी इच्छा क्या है जबरन उस पर पढ़ाई थोपना और अपेक्षित परिणाम न मिलने पर स्कूल से निकाल देना यह आज भी उतनी ही सामान्य मानी जाती है , जितनी कि उस समय …

लेकिन तोमोयो स्कूल और सोसाकु कोबायाशी जैसे हेडमास्टर इस विलक्षण लङ़की के लिए ही बने थे। रेलगाड़ी के पुराने डिब्बों में चलने वाली कक्षा उसका इंतजार जो कर रही थी । उसकी चार घंटे की बकबक को नान स्टाप सुनने वाला वह पिता तुल्य हेडमास्टर उसकी जिन्दगी का सबसे अच्छा दोस्त साबित हुआ।

तोत्तो चान, तोत्तो चान न होती अगर उसे उसकी माँ जैसी माँ न मिलती जो हमेशा उसकी सारी अजीबोगरीब हरकतों को शांति से आँखें मींचकर देखती रही और कभी यह नहीं कहा कि तुम्हें यह नहीं करना चाहिए …

वर्ना एक माँ तोत्तो चान जैसी लङकी को कभी भी पीटे बिना नहीं रह सकती जो रोज जबरन कंटीले तारों के नीचे गड्ढा खोदकर उसमें घुसकर स्टंट करके आती और रोज ही उसकी नई फ्राक और चड्ढी फटी मिलती , कभी वह मल के ढेर के नीचे अपनी टोपी गिरा देती तो कभी अपना बटुआ …

कभी वह सीमेंट प्लास्टर के घोल में सनी मिलती तो कभी बिना सोचे समझे कहीं भी कूद कर आ जाती …

इस पुस्तक को पढ़ते वक्त आप खूब जोर – जोर हँसेंगे और तब की स्थिति से आज की परिस्थितियों को देखते हुए आपकी आँखें भी भींग जाएगी।

सबसे अहम बात कि चाहे आप पचास साल के हों साठ साल के अपना बचपना जरूर गुजरते हुए देख सकेंगे …

यह दुनिया उतनी ही खुबसूरत होनी चाहिए जितनी की युद्ध की विभिषिका से त्रस्त जापान के उस शहर में तोमोयो स्कूल …..

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सीमा संगसार फुलवरिया बरौनी बेगूसराय 

 

 

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